नीतीश कुमार फिर बने JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बिना विरोध चौथी बार संभाली पार्टी की कमान

जनता दल (यूनाइटेड) में एक बार फिर नीतीश कुमार की पकड़ मजबूत होती दिखाई दे रही है। पार्टी ने मंगलवार को घोषणा की कि नीतीश कुमार को बिना किसी विरोध के एक बार फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। यह लगातार चौथी बार है जब वह पार्टी की कमान संभालेंगे। पार्टी की ओर से जारी बयान के अनुसार नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद केवल नीतीश कुमार का ही नामांकन वैध पाया गया। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर अनील प्रसाद हेगड़े द्वारा उनके निर्विरोध चुनाव की प्रक्रिया पूरी की गई। इस संबंध में औपचारिक प्रमाण पत्र दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में दोपहर 2:30 बजे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौंपा जाएगा।

इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। इनमें कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल होंगे। पार्टी ने मीडिया को भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

नीतीश कुमार के इस निर्विरोध चुनाव को पार्टी के भीतर एकजुटता का संकेत माना जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने बताया कि यह निर्णय कार्यकर्ताओं और नेताओं की सामूहिक इच्छा के अनुरूप लिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी चाहते थे कि अनुभवी नेतृत्व के रूप में नीतीश कुमार ही संगठन की जिम्मेदारी संभालते रहें।

संजय झा ने इससे पहले 19 मार्च को जानकारी दी थी कि नीतीश कुमार के नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च निर्धारित थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता राम नाथ ठाकुर ने भी नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पार्टी के मार्गदर्शक हैं और कार्यकर्ताओं की इच्छा थी कि वही आगे भी नेतृत्व करें। उनके अनुसार, नीतीश कुमार का अनुभव न सिर्फ पार्टी बल्कि बिहार के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने स्पष्ट किया कि उनके और नीतीश कुमार के बीच किसी प्रकार का मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि सदस्यता अभियान में उनकी भागीदारी न होने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी नेतृत्व से कोई दूरी है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह निर्विरोध चुनाव आगामी चुनावी रणनीतियों के लिहाज से भी अहम है। इससे पार्टी के भीतर स्थिरता और नेतृत्व की स्पष्टता बनी रहेगी।

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