गणित के डर को खत्म करेगी ‘अनुवादिनी AI’ और ‘मैथजोरो’ की जुगलबंदी, 25 करोड़ छात्रों के लिए शुरू हुई डिजिटल क्रांति

भारत के शिक्षा क्षेत्र से आज एक ऐसी खबर आई है जो करोड़ों छात्रों और अभिभावकों की चिंता को हमेशा के लिए दूर कर सकती है। अक्सर देखा गया है कि स्कूल के दिनों में बच्चों के लिए ‘गणित’ सबसे डरावना विषय होता है, लेकिन अब यह डर, रोमांच में बदलने वाला है। शिक्षा मंत्रालय के तहत AICTE की प्रमुख संस्था ‘अनुवादिनी AI’ और गेमिंग-आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म ‘मैथजोरो’ (MathJoro) ने एक ऐतिहासिक हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का सीधा लक्ष्य भारत के उन 25 करोड़ स्कूली बच्चों तक पहुँचना है, जो भाषा की बाधा और कठिन शिक्षण पद्धतियों के कारण गणित से दूर भागते हैं।

अनुवादिनी AI: भाषा की दीवारों को ढहाने वाला महा-मंच

AICTE मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इस सहयोग की घोषणा की गई। अनुवादिनी AI कोई साधारण अनुवाद उपकरण नहीं है, बल्कि यह दुनिया का पहला ऐसा AI इकोसिस्टम है जो 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं और 89 विदेशी भाषाओं में महारत रखता है। डॉ. बुद्धा चंद्रशेखर (CEO, अनुवादिनी AI) के नेतृत्व में इस मंच ने पहले ही 150 करोड़ से अधिक शैक्षिक पृष्ठों का अनुवाद कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। अब यही शक्ति मैथजोरो के गेमिंग इंटरफेस के साथ मिलकर छात्रों को उनकी अपनी मातृभाषा में शिक्षा देगी।

मैथजोरो: खेल-खेल में गणित का जादू

मैथजोरो के संस्थापक रामादेवु रामकुमार का विजन एकदम स्पष्ट है—”सीखें, खेलें, कमाएँ और अनलॉक करें।” यह प्लेटफॉर्म कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों को बीजगणित (Algebra), ज्यामिति (Geometry) और त्रिकोणमिति (Trigonometry) जैसे विषयों की ‘ज़ोन-आधारित’ यात्रा पर ले जाता है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एप्लिकेशन कम इंटरनेट स्पीड वाले ग्रामीण क्षेत्रों में भी मक्खन की तरह चलता है।

तीन स्तंभों पर टिकी यह महा-साझेदारी

  • रियल-टाइम बहुभाषी अनुभव : अनुवादिनी AI की ‘लाइन-इन ट्रांसलेशन’ तकनीक की बदौलत अब तमिलनाडु का बच्चा तमिल में, असम का बच्चा असमिया में और राजस्थान का बच्चा हिंदी में एक ही समय पर मैथजोरो का आनंद ले सकेगा। यह केवल अनुवाद नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक रूप से सटीक अनुभव है जहाँ निर्देश और गेम की कहानी छात्र की अपनी भाषा में होगी।
  • स्कूली शिक्षा से प्रतियोगी परीक्षाओं तक का सफर : जब छात्र कक्षा 10 तक मैथजोरो से अपनी नींव मजबूत कर लेंगे, तो उनके लिए अगला कदम होगा ‘अनुवादिनी परीक्षा’। यह मंच JEE, NEET और UPSC जैसी परीक्षाओं के लिए उसी भाषा में तैयारी जारी रखने की सुविधा देगा, जिसमें छात्र ने स्कूल में पढ़ाई की है। यानी अब भाषा की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का सपना नहीं टूटेगा।
  • स्मार्ट मूल्यांकन प्रणाली : शिक्षकों के लिए भी यह एक बड़ी राहत है। अनुवादिनी का ‘क्वेश्चन पेपर क्रिएटर’ चंद सेकंड में किसी भी भाषा और किसी भी बोर्ड (CBSE, ICSE, State Boards) के अनुरूप प्रश्न पत्र तैयार कर सकता है। यह तकनीक रटने की प्रथा को खत्म कर वास्तविक समझ का परीक्षण करेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का असली चेहरा

यह साझेदारी केवल दो कंपनियों का मिलन नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘NEP 2020’ के सपनों का साकार रूप है। जहाँ नीति मातृभाषा में शिक्षा की वकालत करती है, वहीं यह प्लेटफॉर्म उसे धरातल पर उतार रहा है। ‘चुटकी 2.0’ जैसे ऑफलाइन उपकरणों के जरिए दूर-दराज के इलाकों में भी शिक्षा की अलख जगाई जा रही है।

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