
Keralam New CM VD Satishan: केरल की राजनीति में आज एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। वी डी सतीशन (V D Satheesan) आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। यह मौका उनके लंबे और संघर्षपूर्ण राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मुकाम है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि कभी वह अपना पहला विधानसभा चुनाव भी हार गए थे।
छात्र राजनीति से पक्की हुई नींव
वीडी सतीशन का राजनीतिक सफर कोच्चि के तेवरा स्थित सेक्रेड हार्ट कॉलेज से शुरू हुआ। 1980 के दशक में जब कैंपस की राजनीति उग्र और विचारधारा वाली हुआ करती थी, तब सतीशन ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ का लोहा मनवाया। उनके करीबी दोस्त रंजीत तंबी बताते हैं कि कॉलेज यूनियन चुनावों के दिन ही साफ हो गया था कि सतीशन में एक बेहतर नेता बनने के सभी गुण मौजूद हैं।
महात्मा गांधी विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष से लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बनने तक, सतीशन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पहली हार से मिला सबक
साल 1996 में वीडी सतीशन ने अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गए। हालांकि, इस हार ने उन्हें टूटने नहीं दिया। पांच साल बाद 2001 में उन्होंने पारवूर सीट से शानदार वापसी की। तब से लेकर अब तक यह सीट उनका अभेद्य किला बनी हुई है। उनकी इस जीत में उनकी कड़ी मेहनत और जमीनी जुड़ाव सबसे बड़ी वजह रही।
जमीनी नेता और बेहतर वकील भी
वीडी सतीशन को सिर्फ एक राजनेता के तौर पर ही नहीं जाना जाता, बल्कि वे केरल उच्च न्यायालय में वकालत भी कर चुके हैं। उनके परिवार वालों को शुरू से ही उम्मीद थी कि वे कांग्रेस पार्टी में एक अहम मुकाम हासिल करेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री पद तक उनका पहुंचना बहुतों के लिए सुखद आश्चर्य है।
एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले सतीशन के लिए उनके परिवार का समर्थन सबसे अहम रहा। उनके भाई-बहन आज भी कोच्चि के नेटूर इलाके में एक सादगी भरी जिंदगी जी रहे हैं।
आज लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ
आज वीडी सतीशन केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। राज्य की जनता को उनसे कई बड़ी उम्मीदें हैं। जो नेता कभी अपना पहला चुनाव हार गया था, आज वही नेता केरल की बागडोर संभालने जा रहा है। उनका यह सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है कि अगर हौसला बुलंद हो और मंजिल साफ हो, तो हार भी मुकाम हासिल करने से नहीं रोक सकती।









