ईद-उल-अजहा 2026 की तारीख तय, भारत और पाकिस्तान में अलग-अलग दिन मनाई जाएगी बकरीद

दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक ‘ईद-उल-अजहा’ (बकरीद) 2026 की तारीखों का आधिकारिक ऐलान हो गया है। सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट सहित संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर, जॉर्डन, भारत और पाकिस्तान की चांद दर्शन समितियों ने अपने-अपने देशों के लिए तारीखों की पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही सऊदी अरब ने इस साल के पवित्र ‘हज 2026’ के शेड्यूल की भी घोषणा कर दी है।

सऊदी अरब में हज और बकरीद की तारीखें

सऊदी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रविवार रात जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, सऊदी अरब में साल 2026 की ईद-उल-अजहा बुधवार, 27 मई को मनाई जाएगी। वहीं, इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक ‘हज 2026’ (यौम-ए-अराफात 1447 हिजरी) मंगलवार, 26 मई 2026 को होगा।

भारत और पाकिस्तान में अलग-अलग दिन मनेगी बकरीद

इस साल भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान में बकरीद अलग-अलग दिनों पर मनाई जाएगी:

  • पाकिस्तान: सेंट्रल रुएत-ए-हिलाल कमेटी पाकिस्तान ने रविवार, 17 मई 2026 को जिल हिज्जा का चांद देखने की पुष्टि की है। इसके तहत पाकिस्तान में बकरीद सऊदी अरब के साथ ही यानी 27 मई को मनाई जाएगी।
  • भारत: भारत में रविवार (17 मई) को देश के किसी भी हिस्से से चांद दिखने की पुष्टि नहीं हुई। इस्लामिक सेंटर के महासचिव मौलाना आलम मुस्तफा यकूबी के मुताबिक, चांद न दिखने के कारण भारत में जिल हिज्जा महीने की शुरुआत मंगलवार, 19 मई से होगी। इसके अनुसार, महीने के 10वें दिन यानी गुरुवार, 28 मई 2026 को भारत में बकरीद मनाई जाएगी। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद शाबान बुखारी ने भी आधिकारिक तौर पर 28 मई को बकरीद मनाने का ऐलान किया है।

दुनिया भर के देशों का शेड्यूल: कहाँ किस दिन मनेगी ईद?

वैश्विक स्तर पर चांद दिखने के समय के आधार पर दुनिया भर के देशों को दो अलग-अलग तारीखों में बांटा गया है:

27 मई 2026 (बुधवार) को मनाने वाले देश28 मई 2026 (गुरुवार) को मनाने वाले देश
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर, ओमान, जॉर्डनभारत
पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्किये, ट्यूनिस, मलेशिया, इंडोनेशियाबांग्लादेश
अमेरिका (USA), कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK), फ्रांस, जर्मनीब्रुनेई
सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड

आस्था, इबादत और त्याग का पर्व है ईद-उल-अजहा

इस्लाम धर्म में ईद-उल-अजहा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे मुख्य रूप से ‘कुर्बानी का त्योहार’ कहा जाता है। यह पर्व पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास, आस्था और महान त्याग की याद में मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुक्म पर अपनी सबसे प्रिय चीज (अपने बेटे) को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए थे। इसी समर्पण को याद करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन बकरे या अन्य हलाल पशु की कुर्बानी देते हैं।

विशेष नमाज का वक्त और तरीका:

बकरीद के दिन सुबह के वक्त विशेष सामूहिक नमाज अदा की जाती है, जो आम दिनों की नमाज से थोड़ी अलग होती है।

  • यह दो रकात की वाजिब नमाज होती है, जिसे अतिरिक्त तकबीरों के साथ पढ़ा जाता है।
  • सभी लोग ईदगाह या मस्जिदों में इकट्ठा होकर इसे सामूहिक रूप से अदा करते हैं।
  • इस नमाज का समय सूरज निकलने के कुछ देर बाद, आमतौर पर सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे के बीच होता है, जिसके तुरंत बाद कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

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