
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस महकमे के भीतर अनुशासनहीनता और सोशल मीडिया गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबित होने वालों में रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात साल 2015 बैच के कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला और नाका कोतवाली में तैनात साल 2011 बैच की महिला हेड कांस्टेबल नीतू सिंह शामिल हैं। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने यह सख्त कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन करने के आरोप में की है।
ड्यूटी के नाम पर हर महीने ₹2000 वसूली का लगाया था आरोप
पूरा मामला पुलिस विभाग के भीतर ही गंभीर आरोप लगाने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने से जुड़ा है। मूल रूप से अमेठी जनपद के गौरीगंज के रहने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने बीते दिनों सोशल मीडिया पर लगातार तीन वीडियो पोस्ट किए थे। इन वीडियो रील में उन्होंने रिजर्व पुलिस लाइन के गणना कार्यालय के प्रभारी और आरआई (RI) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। सुनील का दावा था कि पुलिस लाइन में तैनात हर सिपाही से ड्यूटी लगाने के नाम पर हर महीने 2,000 रुपये की अवैध वसूली की जाती है।
महिला हेड कांस्टेबल ने भी वीडियो बनाकर खोला था मोर्चा
इसी मामले में नाका कोतवाली में तैनात और वर्तमान में कोर्ट सुरक्षा ड्यूटी संभाल रही हेड कांस्टेबल नीतू सिंह ने भी सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने भी नियमों के विपरीत जाकर रिजर्व पुलिस लाइन के गणना कार्यालय प्रभारी और आरआई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की और वीडियो पोस्ट कर दिया। दोनों पुलिसकर्मियों द्वारा सार्वजनिक रूप से विभाग की छवि धूमिल करने को घोर अनुशासनहीनता माना गया।
एसीपी पुलिस लाइन सौम्या पांडे ने बताया कि यह निलंबन आदेश डीसीपी मुख्यालय के निर्देश पर जारी किया गया है। वहीं, लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर ने साफ किया कि यूपी पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी के तहत वर्दी में या सेवा में रहते हुए इस तरह के कृत्य पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। विभाग अपनी अंदरूनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित माध्यम देता है, लेकिन अनुशासन तोड़ने वालों पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आगे भी ऐसी ही दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।









