कब बनी थी पारले की ‘मेलोडी चॉकलेट’, कैसे पहुंचा 60 हजार से 45 हजार करोड़ का सफर ,जानें इसका इतिहास ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों (नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड, यूएई और इटली) के विदेश दौरे के आखिरी पड़ाव पर इटली की राजधानी रोम पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान एक बेहद दिलचस्प और मीठा वाकया सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर दोनों देशों के राजनयिक गलियारों तक सुर्खियां बटोर ली हैं। रोम पहुंचते ही पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की और उन्हें भारत की सबसे आइकॉनिक और मशहूर चॉकलेट ‘पारले मेलोडी’ (Parle Melody) का एक पैकेट सरप्राइज गिफ्ट के रूप में भेंट किया।

पीएम मोदी के गिफ्ट पर मेलोनी का वीडियो वायरल

प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी के इस अनोखे और अनोखे उपहार को देखकर जॉर्जिया मेलोनी बेहद खुश हुईं। उन्होंने तुरंत अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर एक खास वीडियो साझा करते हुए पीएम मोदी का आभार जताया। मेलोनी ने हंसते हुए वीडियो में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए भारत की बेहद मशहूर और बेहतरीन टॉफी मेलोडी उपहार में लाए हैं। यह वीडियो इंटरनेट पर आते ही वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की दोस्ती को लेकर मीम्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। इस वीडियो के हिट होते ही लोग गूगल पर पारले की मेलोडी चॉकलेट का इतिहास खोजने लगे हैं।

1983 में लॉन्च हुई थी ‘पारले मेलोडी’

हर भारतीय के बचपन की पसंदीदा रही ‘मेलोडी’ टॉफी को देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित एफएमसीजी (FMCG) कंपनी ‘पारले प्रोडक्ट्स’ (Parle Products) द्वारा बनाया जाता है। पारले कंपनी ने इस चॉकलेटी कैंडी को आज से करीब 41 साल पहले यानी साल 1983 में भारतीय बाजार में लॉन्च किया था। 1980 और 90 के दशक में मेलोडी ने भारतीय कन्फेक्शनरी मार्केट में कदम रखते ही धूम मचा दी थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, यह हर वर्ग की पहली पसंद बन गई। इस टॉफी की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसके बाहर मौजूद कैरेमल की एक मीठी परत और उसके अंदर भरी हुई गाढ़ी चॉकलेटी क्रीम है। यह दोतरफा स्वाद ही इसे बाकी सभी चॉकलेट और कैंडीज से अलग बनाता है। एक समय था जब यह टॉफी मात्र 50 पैसे में मिलती थी और आज भी यह देश की हर दुकान पर सिर्फ 1 रुपये में मिल जाती है।

‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?’

यदि आप 90 के दशक में बड़े हुए हैं, तो आपको टेलीविजन पर आने वाला मेलोडी का वह एवरग्रीन विज्ञापन जरूर याद होगा। उसका स्लोगन था— “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!” यह टैगलाइन भारत के विज्ञापन इतिहास में सबसे सफल और लोकप्रिय लाइनों में से एक मानी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने आज तक कभी अधिकारिक तौर पर नहीं बताया कि मेलोडी के इतनी चॉकलेटी होने का असली फॉर्मूला क्या है, और यही सस्पेंस आज भी ब्रांड की सबसे बड़ी ताकत है।

60 हजार से 45 हजार करोड़ का सफर

मेलोडी बनाने वाली पारले कंपनी की शुरुआत साल 1929 में मुंबई के विले पारले इलाके में चौहान परिवार (मोहनलाल चौहान) द्वारा की गई थी। शुरुआत में सिर्फ 12 लोगों और 60 हजार रुपये की पूंजी के साथ यह कंपनी बेकरी उत्पाद बनाती थी। 1939 में कंपनी ने बिस्कुट बनाना शुरू किया और ‘पारले-जी’ (Parle-G) लॉन्च किया जो दुनिया का सबसे बड़ा बिकने वाला बिस्कुट ब्रांड बना। इसके बाद कंपनी ने 1983 में मेलोडी और 1989 में ‘मैंगो बाइट’ जैसी कैंडीज बाजार में उतारीं। आज यही पारले कंपनी 45,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मार्केट वैल्यूएशन के साथ वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बढ़ा रही है।

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