
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सिंदेवाही रेंज के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गईं 4 महिलाओं को बाघ ने अपना शिकार बना लिया। इस हमले में चारों महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है, जबकि ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है।
सुबह जंगल गई थीं महिलाएं
जानकारी के मुताबिक यह घटना शुक्रवार सुबह गुंजेवाही गांव के पास जंगल क्षेत्र में हुई। गांव की करीब 13 महिलाएं रोज की तरह तेंदूपत्ता संग्रह करने जंगल गई थीं। इसी दौरान घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। हमला इतना तेज और खतरनाक था कि महिलाओं को संभलने तक का मौका नहीं मिला। बाकी महिलाएं किसी तरह जान बचाकर जंगल से भागीं और गांव पहुंचकर घटना की जानकारी दी।
इन महिलाओं की गई जान
हमले में जान गंवाने वाली महिलाओं की पहचान कवडाबाई दादाजी मोहुरले (45), अनीताबाई दादाजी मोहुरले (40), सुनीता कौशिक मोहुरले (38) और संगीता संतोष चौधरी (50) के रूप में हुई है। सभी महिलाएं गुंजेवाही गांव की रहने वाली थीं और तेंदूपत्ता संग्रह उनके परिवार की आय का बड़ा साधन था।
ग्रामीणों में गुस्सा, वन विभाग पर सवाल
घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से बाघों की गतिविधियां बढ़ रही थीं, लेकिन वन विभाग ने कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद जंगल में गश्त और निगरानी नहीं बढ़ाई गई।
इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। पूरे जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को फिलहाल जंगल में अकेले न जाने की सलाह दी है। वन विभाग की टीम बाघ की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
चंद्रपुर जिला पहले भी मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर चर्चा में रहा है। तेंदूपत्ता सीजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगलों में जाते हैं, जिससे बाघों और इंसानों का आमना-सामना बढ़ जाता है। पिछले साल भी इस इलाके में बाघ के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है। इस ताजा घटना ने एक बार फिर जंगल किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।









