पेट्रोल खपत में उत्तर प्रदेश नंबर वन, महाराष्ट्र को पीछे छोड़ा; प्रति व्यक्ति खपत में गोवा सबसे आगे

PPAC की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा, देश की कुल खपत 4 करोड़ मीट्रिक टन के पार; पर्यटन स्थलों में प्रति व्यक्ति इस्तेमाल राष्ट्रीय औसत से पाँच गुना तक अधिक

नई दिल्ली। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) द्वारा जारी वित्त वर्ष 2024-25 के आँकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा पेट्रोल उपभोक्ता राज्य बनकर उभरा है। 4,832.8 हज़ार मीट्रिक टन (TMT) की रिकॉर्ड खपत के साथ यूपी ने लंबे समय से शीर्ष पर काबिज महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है। यह आँकड़ा देश के कुल पेट्रोल उपयोग का लगभग 12.1 प्रतिशत है । वहीं, प्रति व्यक्ति दैनिक खपत के मामले में गोवा, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसे छोटे राज्य व केंद्र शासित प्रदेश सबसे आगे हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है ।

कुल खपत 4 करोड़ टन के पार

PPAC के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में देश की कुल पेट्रोल खपत 40,004.5 हज़ार मीट्रिक टन रही, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 37,219.4 हज़ार मीट्रिक टन की तुलना में वृद्धि दर्शाती है । यह बढ़ोतरी देश में बढ़ती गतिशीलता, वाहनों के बढ़ते उपयोग और आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी करती है। शीर्ष 10 राज्य मिलकर देश की कुल पेट्रोल खपत का लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा उपभोग करते हैं ।

किस राज्य ने कितना पेट्रोल पिया?

2024-25 में सबसे अधिक पेट्रोल खपत करने वाले शीर्ष 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची इस प्रकार है :

रैंकराज्य / केंद्र शासित प्रदेशपेट्रोल खपत (TMT में)
1उत्तर प्रदेश4,832.8
2महाराष्ट्र4,370.5
3तमिलनाडु3,533.7
4कर्नाटक3,054.3
5गुजरात2,701.2
6राजस्थान2,606.3
7दिल्ली2,068.4
8मध्य प्रदेश2,021.6
9हरियाणा1,964.5
10केरल1,851.3

प्रति व्यक्ति खपत में कौन आगे?

जहाँ कुल खपत में बड़े और आबादी वाले राज्य हावी हैं, वहीं प्रति व्यक्ति पेट्रोल इस्तेमाल की तस्वीर बिल्कुल अलग है। PPAC के आँकड़ों के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय औसत प्रतिदिन प्रति 100 व्यक्ति पर लगभग 10.4 लीटर पेट्रोल खपत का है । लेकिन इस मामले में छोटे राज्य और पर्यटन स्थल राष्ट्रीय औसत से कई गुना आगे हैं :

  • गोवा: प्रतिदिन 52.4 लीटर प्रति 100 व्यक्ति (राष्ट्रीय औसत का लगभग 5 गुना)
  • पुडुचेरी: प्रतिदिन 41 लीटर प्रति 100 व्यक्ति
  • चंडीगढ़: प्रतिदिन 37.8 लीटर प्रति 100 व्यक्ति

विशेषज्ञों के अनुसार, इन क्षेत्रों में पर्यटकों की भारी आवाजाही, रेंटल वाहनों का प्रचलन, उच्च वाहन घनत्व और निजी परिवहन पर अधिक निर्भरता इस असमानुपातिक खपत के प्रमुख कारण हैं ।

Related Articles

Back to top button