उम्मीद पोर्टल पर 31 हज़ार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीयन रद्द, दस्तावेज़ी खामियाँ बनी बड़ी वजह

राजस्व रिकॉर्ड से मिलान न होने और गलत खसरा नंबर दर्ज करने पर हुई कार्रवाई; लखनऊ में सर्वाधिक 1,114 रद्द, 5 जून तक सुधार का मौका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण अभियान के तहत उम्मीद पोर्टल पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 31,328 संपत्तियों का पंजीयन रद्द कर दिया गया है। यह कार्रवाई दस्तावेज़ों में बड़े पैमाने पर पाई गई खामियों, गलत प्रविष्टियों और तकनीकी त्रुटियों के चलते की गई है। राज्य में कुल 1,18,302 पंजीकृत वक्फ संपत्तियों में से 31,192 संपत्तियों पर लगे वक्फ के दावे को सिरे से खारिज कर दिया गया है 

दस्तावेज़ों में क्या रही प्रमुख खामी?

अधिकारियों के अनुसार, निरस्तीकरण की सबसे बड़ी वजह दर्ज खसरा नंबर का वक्फ बोर्ड के मूल रिकॉर्ड से मिलान न होना और राजस्व अभिलेखों में संपत्ति का रकबा (क्षेत्रफल) बदला हुआ पाया जाना रही । कई मामलों में एक ही वक्फ नंबर के तहत कई संपत्तियाँ पंजीकृत कर दी गई थीं, जबकि कहीं गलत आँकड़े और अधूरे दस्तावेज़ जमा किए गए थे । सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ज़ुफ़र अहमद फ़ारूकी ने पुष्टि करते हुए कहा, “ज़्यादातर मामलों में केयरटेकर्स ने या तो डेटा गलत दर्ज किया है या दस्तावेज़ पर्याप्त नहीं थे।” 

जिलेवार हाल: लखनऊ में सर्वाधिक पंजीयन रद्द

प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक पंजीयन राजधानी लखनऊ में रद्द किए गए, जहाँ 1,114 संपत्तियाँ प्रभावित हुई हैं । इसके बाद बिजनौर (1,003) और सहारनपुर (990) का स्थान है । बाराबंकी में 577, अमरोहा में 85, बागपत में 60 और बरेली में 17 पंजीयन रद्द हुए हैं । प्रभावित संपत्तियों में छोटी मस्जिद की ज़मीनों से लेकर 300 एकड़ से अधिक में फैले बड़े कब्रिस्तान तक शामिल हैं । श्रेणी के अनुसार देखें तो सबसे अधिक निरस्तीकरण कब्रिस्तानों का हुआ, जिसके बाद मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों, इमामबाड़ों और दरगाहों का नंबर है 

5 जून तक सुधार का आखिरी मौका

वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर पंजीयन रद्द होने का अर्थ संपत्ति की वक्फ हैसियत समाप्त होना नहीं है । यह पूरी तरह प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें केयरटेकर (मुतवल्ली) त्रुटियों को सुधारकर दोबारा आवेदन कर सकते हैं । इसके लिए पोर्टल पर “करेक्शन” का विकल्प उपलब्ध है। हालाँकि, बोर्ड ने सख्त चेतावनी दी है कि सभी सुधारों की अंतिम तिथि 5 जून, 2026 निर्धारित है । तय समयसीमा में सही दस्तावेज़ अपलोड न करने की स्थिति में इन संपत्तियों को स्थायी रूप से वक्फ रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है । गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के तहत 1.26 लाख से अधिक वक्फ संस्थाएँ हैं, और यह पूरी प्रक्रिया वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत अनिवार्य की गई है

Related Articles

Back to top button