
देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में जज बनना हर वकील के करियर का सबसे बड़ा सपना माना जाता है। सालों की मेहनत, कानून की गहरी समझ और शानदार अनुभव के बाद ही किसी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलती है। इन दिनों सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा चार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक वरिष्ठ एडवोकेट के नाम सुप्रीम कोर्ट जज के लिए केंद्र सरकार को भेजे जाने के बाद यह प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
आमतौर पर हाईकोर्ट के सीनियर जजों को ही सुप्रीम कोर्ट भेजा जाता है, लेकिन कभी-कभी किसी बड़े और अनुभवी वकील को सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनने का मौका भी मिल जाता है।
संविधान में जज बनने के क्या हैं नियम?
भारत के संविधान के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए उम्मीदवार का सबसे पहले भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। इसके बाद उसे निम्नलिखित शर्तों में से कोई एक पूरी करनी होती है:
- वकालत का अनुभव: उम्मीदवार लगातार कम से कम 10 साल तक किसी हाईकोर्ट में वकालत कर चुका हो।
- जज का अनुभव: उम्मीदवार कम से कम 5 साल तक किसी हाईकोर्ट में जज के पद पर रह चुका हो।
- राष्ट्रपति की नजर में योग्यता: यदि राष्ट्रपति की नजर में कोई व्यक्ति कानून का बड़ा जानकार यानी “डिस्टिंग्विश्ड ज्यूरिस्ट” है, तो उसे भी सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा सकता है। हालांकि, इस प्रावधान का इस्तेमाल बहुत कम हुआ है।
कॉलेजियम सिस्टम से होता है उम्मीदवारों का चयन
सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम सिस्टम काम करता है।
- कॉलेजियम की टीम: इस कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं।
- चयन का आधार: यह टीम उम्मीदवार की कानूनी समझ, अनुभव, फैसलों की गुणवत्ता, ईमानदार छवि और वरिष्ठता जैसी बातों को ध्यान में रखकर फैसला लेती है।
- अगला कदम: जब कॉलेजियम किसी नाम पर सहमत हो जाता है, तो वह अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को भेज देता है।
सरकार और राष्ट्रपति की भूमिका
कॉलेजियम से सिफारिश मिलने के बाद कानून मंत्रालय उस पर अपनी प्रक्रिया पूरी करता है। इसके बाद इस फाइल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट के जज की नियुक्ति की जाती है। हालांकि इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कॉलेजियम की सिफारिश की ही होती है।
सीधे वकील से जज बनना क्यों माना जाता है खास?
देश में अधिकतर सुप्रीम कोर्ट जज वही बनते हैं जो पहले हाईकोर्ट में जज रह चुके होते हैं। ऐसे में जब किसी वरिष्ठ वकील को सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जाता है, तो इसे बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है। आजादी के बाद भारत के इतिहास में ऐसे मौके बहुत कम आए हैं जब किसी वकील को सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज बनने का अवसर मिला हो। कानून के जानकारों के अनुसार, यह सम्मान केवल उन्हीं वकीलों को मिलता है जिनकी कानूनी पकड़ बेहद मजबूत हो, छवि साफ हो और जिन्होंने लंबे समय तक शानदार काम किया हो।









