कंफर्म टिकट के बाद भी नहीं मिली सीट,तो उपभोक्ता अदालत ने रेलवे पर ठोका 35,000 रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के सफर में कंफर्म टिकट होने के बावजूद सीट न मिलने और टीटीई (TTE) द्वारा मदद न किए जाने के एक गंभीर मामले में उपभोक्ता अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सीट न मिलने पर उपभोक्ता अदालत ने रेलवे पर 35,000 रुपये का जुर्माना लगाया है. मामला थर्ड एसी (3AC) का है, जहां यात्री की सीट पर किसी ने अवैध कब्जा कर लिया था और टीटीई ने भी मदद नहीं की. अदालत ने यात्री के पक्ष में फैसला देते हुए रेलवे प्रशासन पर कुल 35,000 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है. कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सीट न मिलने पर उपभोक्ता अदालत ने रेलवे पर 35,000 रुपये का जुर्माना लगाया है.

थर्ड एसी में अवैध कब्जा और टीटीई की लापरवाही
यह पूरा मामला ट्रेन के थर्ड एसी (3AC) कोच का है, जहाँ एक यात्री ने अपनी यात्रा के लिए कंफर्म टिकट बुक कराया था. हालांकि, जब यात्री अपनी सीट पर पहुंचा, तो वहां किसी अन्य व्यक्ति ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था. पीड़ित यात्री ने जब इस बात की शिकायत ड्यूटी पर मौजूद टीटीई से की और मदद मांगी, तो टीटीई ने उसकी समस्या को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और कोई सहायता नहीं की.

मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च का मिलेगा हर्जाना
इस असहज सफर के बाद पीड़ित यात्री ने इंसाफ के लिए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता अदालत ने इसे रेलवे की ‘सेवा में गंभीर लापरवाही’ (Deficiency in Service) माना. कोर्ट ने कहा कि कंफर्म टिकट के बाद भी यात्री को सीट न मिलना और सहायता न करना मानसिक प्रताड़ना के दायरे में आता है. इसके तहत कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया है कि वह पीड़ित यात्री को हुई मानसिक प्रताड़ना और अदालती चक्करों में हुए कानूनी खर्च के हर्जाने के रूप में जुर्माने की यह राशि जल्द से जल्द अदा करे.

Related Articles

Back to top button