
उत्तर प्रदेश के होनहार और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले युवाओं के प्रशासनिक सेवा (सिविल सर्विसेज) में जाने के सपने को साकार करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशन में समाज कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही ‘निःशुल्क आईएएस/पीसीएस कोचिंग योजना’ इस समय प्रदेश के युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। निजी संस्थानों की महंगी फीस और कोचिंग के भारी-भरकम खर्च से परेशान गरीब और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है और पंजीकरण कराने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में हर दिन रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 18 जून 2026 तक आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं, जिसके बाद 5 जुलाई 2026 को चयन परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।
865 सीटों पर मिलेगा प्रवेश; मुख्य परीक्षा के लिए विशेष व्यवस्था
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने इस महत्वपूर्ण योजना की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में आईएएस और पीसीएस कोचिंग के लिए कुल 865 सीटें निर्धारित की गई हैं। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कुल सीटों में से 25 प्रतिशत सीटें ‘लेटरल एंट्री’ के लिए आरक्षित रखी गई हैं। यह सीटें उन अभ्यर्थियों को मिलेंगी जो पहले ही सिविल सेवा की प्रारंभिक (प्री) परीक्षा पास कर चुके हैं और अब मुख्य परीक्षा (मेन्स) तथा इंटरव्यू की तैयारी के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन चाहते हैं।
पंजीकरण के आंकड़ों में भारी उछाल
योगी सरकार की इस पारदर्शी योजना को लेकर युवाओं में कितना क्रेज है, इसका अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 1 जून तक ही 5,513 अभ्यर्थी अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जिनमें से 2,848 अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन को अंतिम रूप देते हुए फाइनल लॉक भी कर दिया है।
समाज कल्याण विभाग मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पूरी चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन की कमी या आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के करियर के आड़े न आए। इस योजना के तहत चयनित छात्रों को न केवल मुफ्त कोचिंग मिलेगी, बल्कि उच्च स्तरीय अध्ययन सामग्री (स्टडी मटेरियल) और अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मुफ्त मुहैया कराया जाएगा।









