अफ्रीका माइन से लेकर स्टॉक तक सब गोलमाल, राजेश एक्सपोर्ट्स के फर्जीवाड़े का खुला चक्रव्यूह, जानें पूरा मामला…

राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) मामले में ED की FEMA जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। 7.7 लाख करोड़ की कंपनी में CFO को 2020 से सैलरी नहीं मिली, जबकि MD को महज 17 हजार महीना मिल रहा था।

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी गोल्ड और ज्वेलरी कंपनियों में शुमार ‘राजेश एक्सपोर्ट्स’ और उसके कर्ता-धर्ता राजेश मेहता के खिलाफ चल रही जांच में एक ऐसा सनसनीखेज और चौंकाने वाला कॉरपोरेट घोटाला सामने आया है, जिसने केंद्रीय जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत की जा रही जांच में कंपनी के भीतर वित्तीय हेरफेर और फर्जीवाड़े का एक ऐसा चक्रव्यूह मिला है, जिसे देखकर ईडी अधिकारियों ने भी अपना सिर धुन लिया है। कंपनी ने कागजों पर करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (कुल राजस्व) दर्ज किया है, लेकिन जब अंदरूनी खातों और अधिकारियों की सैलरी की जांच हुई, तो सच सामने आते ही ढोल की पोल खुल गई।

सैलरी का अजीब पैटर्न: CFO को 6 साल से वेतन नहीं, MD को ₹17,000 महीना

ईडी की जांच में जो सबसे अजीबोगरीब और असामान्य बात सामने आई है, वह कंपनी के शीर्ष अधिकारियों का वेतन है। इतने बड़े पैमाने पर व्यापार करने वाली इस कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) को साल 2020 से कोई सैलरी (वेतन) ही नहीं दी गई है। वहीं, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को हर महीने सिर्फ ₹17,000 के आसपास का भुगतान किया जा रहा है। जांच एजेंसी ने इसे कंपनी के विशालकाय स्केल के मुकाबले एक बेहद संदिग्ध और असामान्य पारिश्रमिक पैटर्न (Remuneration Pattern) बताया है, जिसका इस्तेमाल टैक्स चोरी और फंड्स की हेराफेरी के लिए किए जाने की आशंका है।

3,000 करोड़ का विदेशी खेल और गायब मिले माइनिंग के कागज

जांच में यह भी पता चला है कि कंपनी के विदेशी लेन-देन (फॉरेन ट्रांजैक्शंस) की कोई स्पष्ट रिपोर्ट या रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। राजेश एक्सपोर्ट्स द्वारा अफ्रीकी खदानों (African Mines) में किए गए ₹1,035 करोड़ के भारी-भरकम निवेश के दस्तावेज भी गायब मिले हैं। इसके अलावा, ₹3,000 करोड़ के ओपेक (अपारदर्शी) फॉरेन ट्रेड सेट-ऑफ और फैक्ट्री के फिजिकल स्टॉक में करीब 40% की भारी विसंगति (Discrepancy) पाई गई है। बता दें कि मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) पहले ही राजेश एक्सपोर्ट्स पर करीब ₹15.15 लाख करोड़ के बेहिसाब वित्तीय हेरफेर का गंभीर आरोप लगा चुका है। अब ईडी ने कंपनी की संदिग्ध ब्लॉक डील्स, विदेशी ट्रेडिंग और स्टॉक मैनिपुलेशन की फाइलों को पूरी तरह खोल दिया है, जिससे प्रमोटर्स की मुश्किलें बेहद बढ़ने वाली हैं।

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