
पुणे। लोहागढ़ किले में रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल की हत्या के मामले में साजिश की एक के बाद एक परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि केतन की मंगेतर सिया गोयल के संकेत पर ही उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन को किले की चट्टान से नीचे धकेला था। इतना ही नहीं, दोनों ने हत्या को अंजाम देने से पहले इंटरनेट पर हत्या का तरीका भी सर्च किया था।
सीसीटीवी फुटेज ने खोला राज
जांच में पता चला कि वारदात से ठीक एक दिन पहले 17 जून को सिया और चेतन पुणे के एक कैफे में मिले थे। वहां लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में दोनों साफ देखे जा सकते हैं। पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि करीब एक घंटे तक चली यह मुलाकात आखिर हत्या की साजिश से कितनी जुड़ी थी।
कैसे टूटे दोनों आरोपी?
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आमने-सामने की पूछताछ में पहले दोनों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की पूरी कोशिश की। चेतन ने शुरुआत में दावा किया कि वह किले में तो मौजूद था, लेकिन जहां केतन को धक्का दिया गया, वहां नहीं गया था और उसे ठीक से नहीं पता कि क्या हुआ। हालांकि, पुलिस को तुरंत समझ आ गया कि वह झूठ बोल रहा है। आखिरकार दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पूरी साजिश का सिलसिलेवार ब्यौरा दे दिया। साजिश के तहत सिया ने बैठकर इशारा किया, जिसके बाद चेतन आया और उसने केतन को धक्का देकर खाई में गिरा दिया।
क्यों नहीं घर से भागे?
पुलिस ने जब दोनों से पूछा कि एक बेगुनाह की जान लेने के बजाय वे घर से भाग क्यों नहीं गए, तो दोनों ने जवाब दिया कि ऐसा करने से उनके परिवारों की बदनामी होती। फिलहाल दोनों आरोपियों को सात दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है और देर रात तक उनसे पूछताछ जारी रही।
परिवारों ने कहा
केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने बेटे की याद में बिलखते हुए कहा, “मेरे बुढ़ापे का सहारा छीन लिया। अगर वह शादी खत्म करना चाहती थी, तो चली जाती। हत्या करने की क्या जरूरत थी? जब तक हर जिम्मेदार व्यक्ति को सजा नहीं मिल जाती, मैं चैन से नहीं बैठूंगा।” उन्होंने यह भी बताया कि केतन ने सिया के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन परिवार ने उसे गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि दोनों परिवारों के बीच 45-50 साल पुरानी जान-पहचान थी और शादी का प्रस्ताव भी सिया के परिवार की तरफ से ही आया था। वहीं, सिया के पिता ने सख्त तेवर दिखाते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध के लिए जो भी जिम्मेदार हो, उसे भी उसी तरह किले से नीचे फेंक दिया जाना चाहिए, भले ही वह उनकी अपनी बेटी ही क्यों न हो। दूसरी ओर, चेतन के पिता बाबूलाल चौधरी अपने बेटे के बचाव में उतरे और दावा किया कि सिया ने उनके बेटे को झूठे केस में फंसा दिया है।
6 महीने में 2004 बार फोन पर की बात
पुलिस को इस मामले में एक अहम गवाह भी मिल गया है। चेतन की दुकान पर काम करने वाले नीरज कुमार ने बयान दर्ज कराया है, जो साजिश का पर्दाफाश करने में अहम साबित हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, 18 जून को चेतन ने अपना मोबाइल नीरज के पास छोड़ दिया और नीरज का फोन लेकर लोहागढ़ किले पर गया था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सिया और चेतन ने केतन की हत्या से पहले करीब छह महीनों में कुल 2,004 बार फोन पर बात की और इस दौरान 238 घंटे फोन पर बिताए।
महाराष्ट्र सरकार गठित करेगी SIT
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रुख भी अख्तियार कर लिया है। विधानसभा में राकांपा सदस्य सुनील शेल्के द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने राज्य सरकार को मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। सरकार जल्द ही एसआईटी का गठन करेगी।









