
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा कीमत पर शराब बेचने वाले सिंडिकेट के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। लगातार तीसरी बार ओवररेटिंग (तय कीमत से अधिक वसूली) के मामले में पकड़े जाने पर जिलाधिकारी (DM) ने तीन देसी शराब दुकानों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। इस सख्त कार्रवाई के बाद जिले के शराब माफियाओं और अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
इन 3 दुकानों पर लटके ताले
प्रशासन ने जिन दुकानों के खिलाफ यह कड़ी कार्रवाई की है, उनमें शामिल हैं:
- मिलक मुकर्रपुर उर्फ चक्कर की मिलक (अनुज्ञापी: दिलीप राजपाल)
- हैलेट रोड (अनुज्ञापी: राजकुमार)
- एकता विहार मंडी समिति (अनुज्ञापी: अजयपाल)
लाइसेंस निरस्त होने के बाद आबकारी विभाग ने तीनों दुकानों को सील कर वहां ताला लगवा दिया है। जब तक नए सिरे से लॉटरी प्रक्रिया के जरिए इन दुकानों का आवंटन नहीं हो जाता, तब तक आबकारी विभाग खुद अपनी निगरानी में इनका संचालन कराएगा।
दिन और रात का अलग ‘खेल’: ऐसे लूटे जा रहे थे ग्राहक
जांच में सामने आया कि ये दुकानें बेहद शातिर तरीके से ग्राहकों की जेब पर डाका डाल रही थीं। दुकानों पर दिन और रात के लिए अवैध वसूली का अलग-अलग रेट तय था:
- दिन के वक्त: प्रिंट रेट से 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जाते थे।
- रात के वक्त: अंधेरा होते ही यह वसूली बढ़कर 20 रुपये प्रति बोतल हो जाती थी।
ग्राहकों को कोई बिल या रसीद नहीं दी जाती थी। जब कोई विरोध करता, तो ‘कूलिंग चार्ज’ (ठंडी करने का खर्च) या ‘सर्विस चार्ज’ के नाम पर जबरन पैसे ऐंठे जाते थे। इसके साथ ही इन दुकानों के आस-पास नियमों को ताक पर रखकर अवैध कैंटीन चलाने की शिकायतें भी सही पाई गईं।
गन्ना विभाग की ‘गोपनीय’ जांच से खुला राज
मुरादाबाद में शराब सिंडिकेट का दबदबा इतना ज्यादा था कि स्थानीय स्तर पर शिकायतें होने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई करने से कतराते थे। मामला हर बार रफा-दफा हो जाता था। इसके बाद इसकी शिकायत सीधे शासन स्तर (लखनऊ) पर की गई, जहां से एक अनोखी रणनीति बनाई गई।
स्थानीय आबकारी या पुलिस विभाग को भनक न लगे, इसलिए जांच का जिम्मा गन्ना विभाग को सौंपा गया। गन्ना विभाग की अलग-अलग टीमों ने तीन बार बेहद गोपनीय तरीके से इन दुकानों पर छापेमारी की और हर बार ओवररेटिंग का खेल रंगे हाथों पकड़ा। सिविल लाइंस जैसे पॉश इलाके में चल रहे इस गोरखधंधे की रिपोर्ट मिलते ही शासन में खलबली मच गई।
कारण बताओ नोटिस का नहीं था कोई जवाब
गोपनीय जांच की पुख्ता रिपोर्ट के आधार पर बीती 9 जून को तीनों दुकानदारों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था। चूंकि जांच रिपोर्ट में सबूत अकाट्य थे, इसलिए दुकानदार कोई संतोषजनक या तर्कसंगत जवाब नहीं दे पाए। आबकारी विभाग की अंतिम रिपोर्ट मिलते ही जिलाधिकारी ने बिना देर किए तीनों दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। बताया जा रहा है कि यह तीनों दुकानें एक ही बड़े सिंडिकेट द्वारा चलाई जा रही थीं, जिसने कार्रवाई रुकवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया, लेकिन उनकी एक न चली।
क्या कहता है आबकारी नियम?
उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग के नियमों के मुताबिक, ओवररेटिंग पर जुर्माने और सजा का प्रावधान चरणों में होता है:
- पहली बार पकड़े जाने पर: 75 हजार रुपये का जुर्माना।
- दूसरी बार पकड़े जाने पर: 1.50 लाख (डेढ़ लाख) रुपये का जुर्माना।
- तीसरी बार पकड़े जाने पर: सीधे लाइसेंस निरस्तीकरण (रद्द) की कार्रवाई।
ये तीनों दुकानें लगातार तीन बार नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ी गईं, जिसके चलते इन्हें बंद करने की अंतिम कार्रवाई की गई। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की लॉटरी में एकता विहार दुकान के लिए सबसे ज्यादा 22 आवेदन आए थे, जिनका साल 2026-27 के लिए नवीनीकरण (रिन्यूअल) भी हो गया था, लेकिन लालच के चक्कर में अब यह दुकानें सिंडिकेट के हाथ से निकल चुकी हैं।









