
अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में बड़े और निर्णायक फैसले लिए गए हैं। राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं और वित्तीय विवादों के बीच, ट्रस्ट ने अपनी साख बहाल करने की दिशा में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इस महत्वपूर्ण फेरबदल के साथ ही कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया ‘अंतरिम महासचिव’ नियुक्त किया गया है।
साख बहाली के लिए बड़े कदम
दोपहर 3:30 बजे शुरू हुई इस बैठक में सबसे पहले हालिया घटनाओं पर गहरा दुख प्रकट किया गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक के एजेंडा को प्रस्तुत करते हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर चर्चा को आगे बढ़ाया। गौरतलब है कि इन दोनों ने पिछले महीने वित्तीय मामलों और चंदे की देखरेख पर उठ रहे सवालों के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की थी। हालांकि, दर्ज FIR में उनका नाम बतौर आरोपी शामिल नहीं था, लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा की गई पूछताछ के बाद ट्रस्ट की छवि को बचाने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
कृष्ण मोहन संभालेंगे कमान
ट्रस्ट में हुई इस हलचल के बाद, कृष्ण मोहन को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अंतरिम महासचिव के रूप में, उन पर राम मंदिर के सुचारू संचालन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। सूत्रों के अनुसार, आज की बैठक का मुख्य उद्देश्य न केवल इस्तीफा स्वीकार करना था, बल्कि ट्रस्ट के कामकाज के तरीकों में बुनियादी सुधार करना भी था।
अगले दौर की चुनौतियां
राम मंदिर ट्रस्ट के गठन (2020) के बाद से आज की बैठक को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंपत राय और अनिल मिश्रा का हटना ट्रस्ट के भीतर एक बड़े युग के अंत जैसा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नया नेतृत्व मंदिर निर्माण और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर क्या नई नीतियां बनाता है। अयोध्या के संतों और मंदिर प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, जिसे वे सुधार की प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं।









