
आपकी उम्र भी क्या 40 साल है और अचानक आपको मोबाइल की स्क्रीन, अखबार पढ़ते हुए या सुई में धागा पिरोने में दिक्कत होने लगती है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। उम्र के इस पड़ाव पर चश्मे का पावर अचानक बढ़ जाना एक बहुत ही आम समस्या है। आई सर्जन (ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट) के अनुसार, 40 साल की उम्र के बाद आँखों की रोशनी में इस बदलाव को मेडिकल भाषा में ‘प्रेसबायोपिया’ कहते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इससे बचने के क्या उपाय हैं।
40 के बाद आँखों की रोशनी क्यों बढ़ती है?
WebMD और मेयो क्लिनिक के आई केयर एक्सपर्ट्स के अनुसार, हमारी आँखों में एक नेचुरल और फ्लेक्सिबल लेंस होता है। यह लेंस अपना आकार बदलकर दूर और पास की चीज़ों पर फोकस करने में मदद करता है। जानें इसके कारण।
- लेंस का कड़ापन: जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, आंख के लेंस की फ्लेक्सिबिलिटी धीरे-धीरे कम होती जाती है और वह कड़ा हो जाता है।
- मांसपेशियों का कमजोर होना: लेंस के आस-पास की मांसपेशियां (सिलिअरी मसल्स), जो उसे सिकोड़ने और फैलाने का काम करती हैं, उम्र के साथ कमजोर होने लगती हैं।
- फोकस करने में मुश्किल: इस कम फ्लेक्सिबिलिटी के कारण, लेंस पास से गुजरती चीज़ों पर ठीक से फोकस नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि पास से गुजरती चीज़ें धुंधली दिखती हैं और व्यक्ति को ‘रीडिंग ग्लासेस’ या प्लस (+) पावर के चश्मे की ज़रूरत पड़ती है।
प्रेसबायोपिया के क्या है शुरुआती लक्षण
- अगर आपकी उम्र 40 के आस-पास है, तो आपको इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए:
- पढ़ते समय किताब को अपनी आँखों से दूर ले जाना। कम रोशनी में पढ़ने या बारीक काम करने में बहुत दिक्कत होना।
- बारीक काम करने के बाद सिर में दर्द या आँखों में भारीपन। आँखों में लगातार थकान और धुंधलापन।
आँखों को बचाने और उनका ध्यान रखने के आसान तरीके
हालांकि प्रेसबायोपिया उम्र बढ़ने का एक नैचुरल प्रोसेस है जिसे पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन आई एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी आँखों को लंबे समय तक हेल्दी रख सकते हैं:
- 20-20-20 रूल फॉलो करें: अगर आप अपना ज़्यादातर काम कंप्यूटर या लैपटॉप पर करते हैं, तो हर 20 मिनट में कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज़ को 20 सेकंड के लिए देखें। इससे आँखों की मसल्स को आराम मिलता है।
- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर डाइट लें: अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गाजर, कद्दू, खट्टे फल (विटामिन C), नट्स और मछली (ओमेगा-3 फैटी एसिड) शामिल करें। यह आँखों के लेंस को उम्र बढ़ने से बचाता है।
- रेगुलर आई चेकअप: 40 साल की उम्र के बाद, आपको साल में कम से कम एक बार अपनी आँखों की जाँच करवानी चाहिए। इससे मोतियाबिंद या ग्लूकोमा जैसी बीमारियों का समय पर पता चल जाता है।
- यूवी प्रोटेक्शन वाले सनग्लास पहनें: धूप में बाहर जाते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी के सनग्लास पहनें जो नुकसानदायक अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों को रोकते हैं। आंखों की एक्सरसाइज और पूरी नींद ज़रूरी है: हल्की आंखें घुमाने वाली एक्सरसाइज करें और रोज़ाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि आंखों की मसल्स को ठीक होने का समय मिल सके।









