
Varanasi : प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनहीन मामला सामने आया है। एक सेवानिवृत्त शिक्षक और उनकी बीमार पत्नी का आरोप है कि उन्हें ‘आयुष्मान कार्ड’ बनवाने का झांसा देकर उनकी 50 करोड़ रुपये मूल्य की पुश्तैनी जमीन हड़प ली गई। इस मामले में वाराणसी भाजपा के जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह समेत 10 लोगों के खिलाफ रोहनिया थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मोहनसराय निवासी प्रमिला मिश्रा ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि उनके पति ओमप्रकाश मिश्रा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। प्रमिला ने आरोप लगाया कि उन्हें झांसा दिया गया कि आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए रजिस्ट्री कार्यालय में हस्ताक्षर की आवश्यकता है।
पीड़ित महिला का दर्द बयां करते हुए बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है: “मैं बहुत बीमार हूं, चल-फिर नहीं सकती। पति को ऊंचा सुनाई देता है। मुझसे कहा गया कि पांच लाख के मुफ्त इलाज वाला आयुष्मान कार्ड बनवा देते हैं, बस दफ्तर चलकर साइन कर दीजिए। कहा गया कि यही अंतिम साइन है। कुछ हफ्तों बाद पता चला कि हमारा पूरा घर और जमीन ही लिखवा ली गई।”
ऐसे रची गई साजिश
आरोप है कि 7 अप्रैल 2026 को ओमप्रकाश मिश्रा की डायलिसिस हुई थी। उस समय वे अर्धचेतन अवस्था में थे। इसी स्थिति का लाभ उठाकर उन्हें गंगापुर उपनिबंधन कार्यालय ले जाया गया। वहां चंद मिनटों के भीतर पहले 660 वर्गमीटर जमीन का बैनामा कराया गया, फिर दो दानपत्रों के जरिए करीब 65 बिस्वा भूमि और एक व्यावसायिक गोदाम आरोपियों के नाम ट्रांसफर करा लिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि उसी रात यह संपत्ति किसी और को बेच भी दी गई। यही नहीं, आरोपियों ने पीड़ित का मोबाइल नंबर और पेंशन खाते से जुड़ा फोन नंबर भी बदल दिया।
कोर्ट के दखल के बाद दर्ज हुई FIR
पीड़ित दंपत्ति ने बताया कि उन्होंने स्थानीय थाने से लेकर पुलिस कमिश्नर और उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर उन्होंने CJM कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के सख्त आदेश के बाद आखिरकार रोहनिया थाने में भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह और अन्य 10 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
आरोपी भाजपा नेता का पक्ष
वहीं, दूसरी ओर आरोपी भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह पूरी तरह से एक पारिवारिक मामला है जो चाचा-भतीजे के बीच विवाद से जुड़ा है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि भतीजे को दान में मिली जमीन को उन्होंने पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए खरीदा है।
फिलहाल, इस घटना ने वाराणसी के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और पीड़ित दंपत्ति अब न्याय की आस में प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।









