
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षाविद सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल आज 18वें दिन भी जारी रही, जबकि उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता गहराती जा रही है। इस बीच उनकी भूख हड़ताल जबरन खत्म कराकर खाना खिलाने की मांग को लेकर अदालत में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि अगर दो दिन के अंदर उन्हें उपचार नहीं मिला तो उनकी जान जा सकती है।
याचिका में क्या कहा गया?
कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को उचित निर्देश देने की मांग की गई है ताकि वांगचुक को तुरंत अस्पताल ले जाकर जबरन भोजन कराया जा सके। याचिका में बताया गया कि सोनम वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम घट गया है, उनका ब्लड प्रेशर घटकर 107/70 एमएमएचजी और ब्लड शुगर का स्तर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रह गया है। याचिका में कहा गया कि अगर उनकी जान चली गई तो यह पूरे देश-दुनिया के लिए बेहद शर्मनाक होगा।
प्रदर्शन स्थल का क्या है हाल?
सोनम वांगचुक प्रदर्शन स्थल पर एक सफेद गद्दे पर लेटे हुए हैं और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। वह काफी कमजोर नजर आ रहे हैं और खड़े होने या बैठने की कोशिश करने पर उन्हें चक्कर आ जाते हैं, यहां तक कि वॉशरूम जाने में भी उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील करते हुए कहा कि लोगों की जान दांव पर लगी है।
क्या है प्रदर्शन की वजह?
नीट पेपर लीक के मुद्दे के बाद शुरू हुए इस प्रदर्शन के समर्थन में सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस बीच प्रदर्शनकारियों की ओर से 20 जुलाई को संसद तक पदयात्रा का ऐलान भी किया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस जनहित याचिका पर कब और क्या फैसला सुनाती है।









