रामधन गबन मामला: सुप्रीम कोर्ट में 20 जुलाई को होगी सुनवाई, SIT से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट

अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को सुनवाई ...

अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत की सूची के मुताबिक, इस मामले से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। इसके साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।

राम मंदिर ट्रस्ट को पब्लिक ट्रस्ट बनाने की मांग

मामले में मुख्य पक्षकारों में शामिल निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अखाड़े ने केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन कर इसे पूरी तरह से पब्लिक ट्रस्ट बनाया जाए।

निर्मोही अखाड़े ने उठाए कई सवाल

निर्मोही अखाड़े का कहना है कि मौजूदा ट्रस्ट का ढांचा प्राइवेट ट्रस्ट जैसा है, जो नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भावना के खिलाफ है। याचिका में मांग की गई है कि ट्रस्ट की ओर से अब तक किए गए सभी आर्थिक और संपत्ति संबंधी लेन-देन की जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया जाए।

पुरानी मूर्तियों की बहाली की मांग

निर्मोही अखाड़े ने मांग की है कि 5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को कुर्क की गईं रामलला की मूल मूर्तियों को वापस गर्भगृह में स्थापित किया जाए। अखाड़े का कहना है कि ट्रस्ट को मूल मूर्तियों को बदलने या हटाने का कानूनी अधिकार नहीं था।

पूजा पद्धति और व्यवस्था को लेकर मांग

अखाड़े ने मांग की है कि राम मंदिर में सभी रीति-रिवाज, सेवा, भोग और पूजा रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं और निर्मोही अखाड़े की पुरानी व्यवस्था के अनुसार होनी चाहिए। साथ ही ट्रस्ट के फैसलों पर संतों की निगरानी के लिए गाइडलाइंस बनाने और सुप्रीम कोर्ट के 2019 के आदेशों के पालन की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की गई है।

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