न्याय के मंदिर में अपराधी नहीं पहन सकेंगे काला कोट… जानें अब क्या होगा दागी वकीलों का भविष्य…

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जघन्य अपराधों के आरोपी वकीलों की प्रैक्टिस पर लगाई रोक। अब 7 साल से ज्यादा सजा वाले मामलों में आरोपी वकील नहीं कर पाएंगे वकालत। जानें कोर्ट के इस बड़े फैसले की पूरी जानकारी।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की न्यायिक प्रणाली में शुचिता और गरिमा बनाए रखने के लिए एक अत्यंत साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जघन्य अपराधों के आरोपी वकील कोर्ट में काला कोट पहनकर वकालत नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य न्याय के मंदिर को माफियाओं, गैंगस्टरों और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से मुक्त कराना है।

कोर्ट ने अपने सख्त आदेश में कहा है कि जिन वकीलों पर ऐसे जघन्य अपराधों के आरोप हैं, जिनमें 7 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उन्हें मुकदमा खत्म होने तक वकालत करने से रोक दिया जाएगा। हालांकि, पारिवारिक और वैवाहिक विवादों से संबंधित मामलों में वकीलों को इस पाबंदी से छूट दी गई है। बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कानूनी पेशे को अपनी ‘सुरक्षित शरणस्थली’ बनाने वाले असामाजिक तत्वों के लिए अब जगह नहीं है। जो व्यक्ति खुद कानून के कटघरे में है, वह किसी दूसरे को न्याय कैसे दिला सकता है?

अदालत ने आरोपी वकीलों के स्थानीय रसूख को खत्म करने के लिए भी एक मास्टरस्ट्रोक चला है। ऐसे वकीलों के केस अब उनके गृह जिले में नहीं, बल्कि 100 किलोमीटर दूर किसी अन्य नामित अदालत में स्थानांतरित किए जाएंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि आरोपी वकील गवाहों, पुलिस या कोर्ट स्टाफ पर अपना प्रभाव न डाल सकें।

इस आदेश को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी हर जिले के डिस्ट्रिक्ट जज, डीएम और पुलिस कमिश्नर/एसएसपी को सौंपी गई है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी दागी वकील कोर्ट परिसर में प्रैक्टिस के लिए प्रवेश न करे। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यह रोक उन वकीलों पर लागू नहीं होगी जो किसी मामले में खुद पक्षकार या आरोपी के रूप में उपस्थित हो रहे हैं।

साथ ही, मुवक्किलों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि प्रभावित मुवक्किल को नया वकील चुनने का पूरा अवसर मिले। यदि कोई मुवक्किल आर्थिक तंगी के कारण वकील नहीं रख पा रहा है, तो ‘जिला विधिक सेवा प्राधिकरण’ उसे मुफ्त में योग्य वकील प्रदान करेगा। यह फैसला न्याय व्यवस्था में आम जनता का भरोसा बहाल करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

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