
मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक पास हो गया है। विधेयक के सदन में पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त घमासान छिड़ गया। विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक यूसीसी बिल को प्रवर समिति (Select Committee) में भेजने की मांग को लेकर लगातार वेल में उतरकर नारेबाजी करते रहे, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सत्ता पक्ष के विधायकों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाकर इसका कड़ा पलटवार किया।
मध्यप्रदेश
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) July 21, 2026
➡मध्यप्रदेश में विधानसभा में UCC बिल पास
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‘अलग-अलग मजहबी कानून नहीं चलेंगे’ – सीएम मोहन यादव
हंगामे के बीच मोर्चा संभालते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़े तेवरों में कहा कि राज्य में अब अलग-अलग मजहबी तौल-कांटा नहीं चलेगा। प्रदेश राम से रहीम तक और एंथोनी से अकबर तक एक ही संविधान से संचालित होगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य की 76% मुस्लिम बहनों और 40% मुस्लिम भाइयों ने भी यूसीसी का समर्थन किया है। गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद अब मध्य प्रदेश भी उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जहाँ यह कानून लागू होने जा रहा है। सीएम ने विपक्ष पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में अलग-अलग नागरिकों के लिए अलग कानून नहीं हो सकते।
कांग्रेस ने लगाया टारगेट करने का आरोप
दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए दावा किया कि इसमें कई विसंगतियां हैं। उन्होंने कहा कि संविधान का आर्टिकल 29 अल्पसंख्यकों को उनकी संस्कृति की रक्षा का अधिकार देता है और यूसीसी लाकर एक वर्ग विशेष को टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून से राहत दी गई है, तो मुस्लिम वर्ग को भी वही छूट मिलनी चाहिए।
कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल का पलटवार
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह बिल किसी बंद कमरे में नहीं बना है, बल्कि सरकार ने करीब 10 लाख लोगों का जनमत संग्रह कराया है। ‘एक देश, एक विधान’ के संकल्प के तहत ही यह कदम उठाया गया है। वहीं, मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि कांग्रेस के पास बहस के लिए तर्क नहीं हैं और वह केवल चर्चा से भागना चाहती है। भारी हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।









