
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया 9 सदस्यीय बैठक कई बड़े और गंभीर कारणों से चर्चा के केंद्र में आ गई है। एक तरफ जहां ट्रस्ट ने धार्मिक समितियों के गठन और अन्य प्रशासनिक बदलावों पर फैसले लिए, वहीं दूसरी तरफ मंदिर निर्माण और कोष से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी जाने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में राम धन गबन और लूट के कथित मामलों व जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई।
इस उच्चस्तरीय बैठक में कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरि, चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका और उन पर उठ रहे सवालों के बीच किसी भी प्रकार की ठोस बात न होने से असंतोष जताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि राम धन के कथित गबन और लूट के मामलों पर लीपापोती करने की पूरी तैयारी चल रही है, जिसके चलते इन गंभीर विषयों को आधिकारिक एजेंडे से दूर रखा गया।
समितियों का गठन और मीडिया के लिए प्रवक्ता का फैसला
ट्रस्ट की इस 9 सदस्यीय बैठक में हालांकि अपने कुछ चुनिंदा और खास संतों को महत्वपूर्ण समितियों में जरूर जगह दी गई है, लेकिन वित्तीय अनियमितताओं के दावों पर कोई एक्शन न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा, बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि भविष्य में मीडिया से संवाद करने और आधिकारिक बयान जारी करने के लिए एक विशेष ‘प्रवक्ता’ (Spokesperson) की नियुक्ति की जाएगी, ताकि बयानों में एकरूपता बनी रहे।
फिलहाल, राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर इन अंदरूनी कलह और गंभीर आरोपों के बीच पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। देखना यह होगा कि ट्रस्ट आने वाले दिनों में इन वित्तीय और प्रबंधकीय विवादों पर क्या रुख अपनाता है।









