
E20 पेट्रोल को लेकर चल रहे विवाद के बीच ट्रांसपोर्ट से जुड़ी संसदीय समिति ने सरकार के अधिकारियों से कई अहम सवाल पूछे हैं। समिति ने पूछा कि नॉन-E20 वाहनों के मालिकों को पहले से यह जानकारी क्यों नहीं दी गई कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में कमी आ सकती है।
बता दे कि JDU सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सड़क परिवहन मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों, वाहन टेस्टिंग एजेंसियों और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाया था। बैठक में पुराने वाहनों पर E20 फ्यूल के असर और माइलेज को लेकर चर्चा हुई।
E20 से कितना घटता है माइलेज ?
सूत्रों के अनुसार, समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से पूछा कि क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन मालिकों को आर्थिक फायदा हुआ है या नहीं, इसका कोई अध्ययन किया गया है।हालांकि समिति के सदस्यों ने माना कि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
वही बैठक में E20 पेट्रोल से माइलेज में होने वाली कमी को लेकर भी सवाल किए गए। सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि माइलेज में कमी लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर 25 प्रतिशत तक माइलेज घटने की बातें कही जा रही हैं, लेकिन उनके पीछे ठोस आधार नहीं है।
जाने अचानक क्यों बढ़ा विवाद ?
समिति के सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार के अनुसार 19 प्रतिशत से ज्यादा एथनॉल मिश्रित ईंधन पिछले दो साल से अधिक समय से उपलब्ध है, तो अब अचानक इसका विरोध क्यों बढ़ रहा है।
अधिकारियों ने विवाद के पीछे दो संभावित कारण बताए। इनमें ज्यादा एथनॉल मिश्रण वाले E22, E25 और E30 ईंधन के लिए BIS नोटिफिकेशन और मिलावटी ईंधन की बिक्री जैसे मुद्दे शामिल हैं।









