
हापुड़। श्रावण मास में जहां लाखों शिवभक्त तरह-तरह की कांवड़ लेकर भोलेनाथ के जयकारों के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं एक श्रद्धालु अपनी अद्भुत तपस्या से हर किसी का ध्यान खींच रहा है। यह भक्त गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का संकल्प लेकर हरिद्वार से अलीगढ़ तक दांतों से रस्सी बांधकर कार खींचता हुआ कांवड़ लेकर जा रहा है। उसकी यह अनूठी यात्रा आस्था के साथ-साथ गो सेवा का गहरा संदेश भी दे रही है।
कौन हैं यह अनोखे शिवभक्त?
अलीगढ़ जिले के गांव छजुपुर के रहने वाले नरेंद्र जाट ने यह कठिन संकल्प लेकर कांवड़ उठाई है कि गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना ही चाहिए। वह जिस भी रास्ते से गुजर रहे हैं, वहां श्रद्धालु और राहगीर ठिठककर इस अद्भुत नजारे को देख रहे हैं। कोई उन पर फूल बरसा रहा है, तो कोई जलपान कराकर इस तपस्या को प्रणाम कर रहा है। ‘भोलेनाथ की जय’ और ‘गौ माता की जय’ के उद्घोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा है।
क्या है उनका उद्देश्य?
नरेंद्र जाट का कहना है कि गोमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक हैं। उनका मकसद किसी से विरोध करना नहीं, बल्कि समाज और सरकार का ध्यान गो संरक्षण, गो सेवा और गो माता के सम्मान की तरफ खींचना है। उन्हें पूरा विश्वास है कि अगर समाज गो माता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझेगा, तभी सनातन संस्कृति की जड़ें और ज्यादा मजबूत होंगी।
10 जुलाई को हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा
नरेंद्र जाट ने बताया कि उन्होंने 10 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर कार को दांत से खींचते हुए अलीगढ़ के लिए यात्रा शुरू की थी। रविवार को वह हापुड़ पहुंचे और 11 अगस्त को अलीगढ़ में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। दांतों से रस्सी पकड़कर कार खींचना बेहद कठिन तपस्या है। लगातार कई किलोमीटर तक यह अभ्यास करते हुए उन्हें आगे बढ़ना पड़ रहा है, लेकिन उनके साथी भी इस यात्रा में उनके साथ चल रहे हैं। बुलंदशहर रोड पर पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उन पर पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया।









