
केंद्र सरकार ने संसद में पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की नीति का पुरजोर बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि यह दूरदर्शी कदम न उठाया गया होता, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की स्थिति में देश में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती। चूंकि देश में वर्तमान में पेट्रोल में 20% एथनॉल मिलाया जा रहा है और एथनॉल का उत्पादन देश के भीतर ही होता है, इसलिए इसकी कीमत पहले से तय रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मंहगाई का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।
गरीबों के अनाज के इस्तेमाल के आरोपों का खंडन
मंत्रालय ने उन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि गरीबों के लिए निर्धारित खाद्यान्न या सब्सिडी वाले एफसीआई (FCI) चावल को एथनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। सरकार ने साफ किया कि यह नीति पूरी तरह पारदर्शी और सुनियोजित है।
वर्तमान कीमतें और माइलेज पर असर
गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में शुरू हुए संघर्ष के बाद भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लगभग 75 दिनों तक स्थिर रखा था, जिसके बाद मई में इनमें 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। वर्तमान में राजधानी दिल्ली में स्टैंडर्ड E-20 पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि बिना एथनॉल वाले शुद्ध पेट्रोल की कीमत 169 रुपये प्रति लीटर तक है। वहीं, सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा में जानकारी दी कि E-10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों में E-20 पेट्रोल डालने से माइलेज या ईंधन दक्षता में 2% से 6% तक की मामूली कमी आ सकती है।
जांच और टेस्टिंग के बाद लिया गया निर्णय
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा को बताया कि E-20 पेट्रोल को बाजार में उतारने से पहले ऑटोमोबाइल और तेल कंपनियों के साथ व्यापक परामर्श किया गया। इंजन की मजबूती, पार्ट्स की अनुकूलता और प्रदूषण नियंत्रण की पूरी जांच-परख के बाद ही यह वैज्ञानिक और चरणबद्ध फैसला लिया गया है।









