पाकिस्तानी नेवी के जहाजों की खतरनाक हरकत पर पूर्व प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने जताई कड़ी आपत्ति… बताया ‘अनप्रोफेशनल’

उत्तर अरब सागर में Pak नेवी के जहाज PNS हुनैन की भारतीय युद्धपोत से टक्कर। भारत ने पाक राजनयिक को तलब कर जताया कड़ा विरोध।

उत्तरी अरब सागर में भारत और पाकिस्तान की नेवी के बीच एक गंभीर और तनावपूर्ण घटना सामने आई है। यहाँ भारतीय नेवी के एक फ्रंटलाइन वॉरशिप और पाकिस्तानी नेवी के ऑफशोर पेट्रोल वेसल ‘PNS हुनैन’ के बीच टक्कर हो गई। इस घटना के बाद भारतीय नौसेना के पूर्व प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने पाकिस्तानी नेवी के इस रवैये को बेहद खतरनाक, “मंज़ूर नहीं और अनप्रोफेशनल” करार दिया है। उन्होंने कहा कि समुद्र में जहाजों के संचालन के लिए कड़े अंतरराष्ट्रीय नियम और मानक सुरक्षा दूरियां तय होती हैं, जिनका उल्लंघन करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, यह घटना 15 सितंबर को उस समय हुई जब भारतीय नेवी का जहाज उत्तरी अरब सागर में एक रूटीन सर्विलांस मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नेवी का जहाज ‘PNS हुनैन’ अत्यधिक तेज गति से आया और बेहद असुरक्षित तरीके से भारतीय युद्धपोत के करीब मंडराने लगा, जिसके परिणामस्वरूप दोनों जहाजों में टक्कर हो गई। हालांकि, गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने सामरिक हलकों में हलचल मचा दी है। घटना के बाद क्षतिग्रस्त पाकिस्तानी जहाज को बंदरगाह की ओर लौटते हुए देखा गया।

बता दें, मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने त्वरित कूटनीतिक कदम उठाए हैं। नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय (MEA) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान उच्च आयोग के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया और उनके सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी नेवी का यह कृत्य अप्रैल 1991 में सैन्य अभ्यास और नौसेना गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के आर्टिकल 10 का सीधा उल्लंघन है। इसके साथ ही, इस्लामाबाद में भारतीय पक्ष ने भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराया है।

कैप्टन डीके शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की लापरवाह और उकसावे वाली हरकतों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो कुछ ही पल में हालात बिगड़ सकते हैं और एक बड़े टकराव का खतरा पैदा हो सकता है। भारत ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि भविष्य में ऐसी हरकतों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी सैन्य यूनिट्स को अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करना होगा।

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