
भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को एक नया आयाम देने की दिशा में एक बेहद अहम कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और ज्यादा मजबूत करने के उद्देश्य से, उज़्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से औपचारिक मुलाकात की। यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई है जब मध्य एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और नई दिल्ली तथा ताशकंद के बीच आपसी सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उज़्बेक विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और उज़्बेकिस्तान के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें सदियों पुराने सिल्क रोड ट्रेड रूट से जुड़ी हुई हैं। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, दोनों देशों के बीच वास्तुकला, भाषा, खान-पान, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं की एक गहरी साझा विरासत है, जो दोनों राष्ट्रों के आपसी विश्वास को और अधिक पुख्ता करती है। इस दौरे का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देना रहा है।
इस हाई-लेवल विजिट के दौरान आयोजित ‘इंडिया-उज़्बेकिस्तान बिजनेस फोरम’ दोनों देशों के व्यावसायिक समुदायों के बीच बढ़ते भरोसे का एक बड़ा प्रमाण है। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर पूरा भरोसा जताया कि माइनिंग सेक्टर, विशेष रूप से रेयर अर्थ मिनरल्स, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने शिक्षा और पेशेवर आदान-प्रदान की भी खुलकर सराहना की। भारत के ‘इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (ITEC) कार्यक्रम और स्कॉलरशिप योजनाओं के जरिए अब तक 3,000 से अधिक उज़्बेक अधिकारियों और छात्रों को सीधा लाभ मिला है। साथ ही, 16,000 से अधिक भारतीय छात्र इस समय उज़्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहे हैं।
बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने मध्य एशिया में शांति, स्थिरता और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया। उज़्बेक विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का यह 2 से 5 अगस्त तक का भारत दौरा दोनों देशों की दोस्ती को एक नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है। इस उच्चस्तरीय बातचीत से व्यापार, तकनीक और संस्कृति के मोर्चे पर जो समझौते हुए हैं, वे आने वाले समय में दक्षिण और मध्य एशिया की भू-राजनीति में एक मील का पत्थर साबित होंगे।









