
उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर अयोध्या से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण को लेकर अब वित्तीय अनियमितताओं और घोटाले के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह आरोप किसी और ने नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े रहे पूर्व अकाउंटेंट और लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने लगाए हैं। उनके इन तीखे और चौंकाने वाले दावों के बाद धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से भारी हलचल मच गई है और चारों तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने इस पूरे मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दिए हैं। उनका दावा है कि राम मंदिर के निर्माण के लिए जो शुरुआती वित्तीय अनुमान (Budget Estimate) तय किया गया था, वह लगभग 800 करोड़ रुपये का था। हालांकि, हकीकत में इसके मुकाबले कहीं अधिक राशि खर्च की गई है। महिपाल सिंह का आरोप है कि मंदिर निर्माण के नाम पर वास्तव में करीब 2,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो कि शुरुआती अनुमानित बजट से लगभग 1,400 करोड़ रुपये अधिक है।
इस भारी-भरकम अंतर और वित्तीय आंकड़ों को लेकर पूर्व अकाउंटेंट ने एसआईटी के समक्ष कई सवाल खड़े किए हैं और सबूत पेश किए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर बजट का बढ़ना और खर्चों का हिसाब स्पष्ट न होना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है। हालांकि, इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासनिक और संबंधित ट्रस्ट की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है।
राम मंदिर का निर्माण देश के सबसे बड़े और संवेदनशील प्रोजेक्ट्स में से एक रहा है, जिसके देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालु जुड़े हुए हैं। ऐसे में निर्माण लागत में भारी फेरबदल और घोटाले के इन आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच और उन सबूतों पर टिकी हैं जो पूर्व अकाउंटेंट द्वारा सौंपे गए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भूचाल आ सकता है।









