कौन है फर्जी IAS मनीष कुमार गुप्ता? करोड़ों का आलीशान मकान और विदेशी गाड़ियों के साथ कैसे हुआ इस शातिर नटवरलाल का पर्दाफाश…

बिहार के खगड़िया में फर्जी आईएएस मनीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। करोड़ों का आलीशान मकान और विदेशी गाड़ियों के शौकीन इस ठग का भंडाफोड़ एसपी भानू प्रताप सिंह की सतर्कता से हुआ। पूरी खबर पढ़ें।

बिहार के खगड़िया जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ खुद को केंद्र सरकार का बड़ा अधिकारी बताकर रौब झाड़ने वाला एक फर्जी IAS अधिकारी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। गोगरी-जमालपुर के रहने वाले मनीष कुमार गुप्ता का भौकाल ऐसा था कि बड़े-बड़े अधिकारी और आसपास के लोग भी चकमा खा जाते थे। हालांकि, खगड़िया एसपी भानू प्रताप सिंह की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते इस शातिर ‘नटवरलाल’ का काला सच आखिरकार दुनिया के सामने आ गया।

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी मनीष कुमार गुप्ता अपने घर में ही ज्यादातर पैक रहता था और आईएएस का फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर अपना रसूख बनाए हुए था। गोगरी-जमालपुर में उसका करोड़ों रुपये का आलीशान मकान है और उसके पास विदेशी गाड़ियां भी मौजूद हैं। एक प्राध्यापक के पुत्र द्वारा कम समय में इतनी अकूत संपत्ति और शान-शौकत कैसे खड़ी कर ली गई, यह देखकर स्थानीय लोग भी अचंभित थे। कहा जा रहा है कि दिल्ली से लेकर विदेशों तक उसकी संपत्ति फैली हुई है और वह लंबे समय से अपनी पहुंच के बल पर यह खेल चला रहा था।

इस खुलासे के पीछे खगड़िया एसपी भानू प्रताप सिंह द्वारा शुरू की गई एक नई पहल महत्वपूर्ण साबित हुई। एसपी ने सोशल मीडिया पर एक विशेष पोर्टल जारी किया था, जिसमें आम लोगों से बिना किसी डर के सूचनाएं साझा करने की अपील की गई थी और नाम गुप्त रखने का भरोसा दिया गया था। इसी पोर्टल पर किसी शख्स ने फर्जी आईएएस मनीष गुप्ता के बारे में गुप्त सूचना दी। सूचना मिलते ही एसपी ने तत्काल एक टीम गठित की और गोगरी-जमालपुर स्थित उसके आवास पर छापेमारी कर दी।

छापेमारी के दौरान जब पुलिस ने दबिश दी, तो मनीष के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली से लेकर पटना तक के कई ताकतवर लोग वरीय अधिकारियों को लगातार फोन कर पैरवी करने में जुटे रहे। हालांकि, एसपी भानू प्रताप सिंह की सख्ती के आगे किसी की नहीं चली। पुलिस ने उसके घर से विभिन्न कंपनियों के पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनका लॉक खुलवाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इन मोबाइलों के सीडीआर (CDR) और डेटा खंगालने पर कई बड़े सफेदपोशों और ताकतवर चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं, जो इस फर्जीवाड़े में पर्दे के पीछे शामिल थे।

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