खकरा रिवर फ्रंट पर कब्जे का खेल! सरकारी जमीन पर बिना नक्शे चार मंजिला इमारत, संरक्षण पर सवाल

पीलीभीत में सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों को लेकर पीलीभीत में एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मामला खकरा नदी रिवर फ्रंट से जुड़ा है, जहां शिकायतकर्ता ने कथित भूमाफियाओं आमिर मलिक समेत दो पर सरकारी जमीन कब्जाने, रिवर फ्रंट की दीवार तोड़कर रास्ता बनाने और बिना स्वीकृत नक्शे के चार मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई । यही नहीं निर्माण के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने निर्माण रोकने के लिए नोटिस दिया बाबजूद जिले के एक माननीय के दबाव में नोटिस बेअसर हो गया और दोबारा अफसरों की जाने की हिम्मत नहीं पड़ी जिसके चलते चार मंजिला इमारत बनकर खड़ी हो गई ।

सरकारी जमीन पर कब्जा, फिर खड़ी कर दी चार मंजिला इमारत!

शिकायत के मुताबिक, सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के बाद निर्माण का खेल इस कदर आगे बढ़ा कि देखते ही देखते तीन मंजिला इमारत खड़ी हो गई। ऐसे में सवाल है कि जब नक्शा पास नहीं था तो निर्माण कार्य क्यों नहीं रुकवाया गया ।

माफियाओं ने रिवर फ्रंट की दीवार भी नहीं छोड़ी!

आरोप है कि कथित कब्जेदारों ने खकरा रिवर फ्रंट की दीवार तक तोड़ डाली और वहां रास्ता बना दिया।
यानी आरोप केवल सरकारी जमीन पर कब्जे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी परियोजना से जुड़ी संरचना को नुकसान पहुंचाने का भी है। अब सवाल यह है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?

नोटिस आया, लेकिन निर्माण नहीं रुका?

मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि निर्माण के दौरान मजिस्ट्रेट का नोटिस भी जारी हुआ, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर निर्माण जारी रहा। अगर नोटिस के बावजूद काम चलता रहा, तो फिर प्रशासनिक अमला कहां था?
क्या नोटिस सिर्फ कागज पर जारी हुआ और जमीन पर निर्माण बेखौफ चलता रहा?

अफसरों की चुप्पी पर भी सवाल

शिकायतकर्ता ने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ कथित कब्जे का नहीं, बल्कि कथित प्रशासनिक लापरवाही और संरक्षण का भी उठ रहा है।

2022 में हुआ था रिवर फ्रंट का शिलान्यास..माफियाओं ने किया धराशाही,

खकरा रिवर फ्रंट का शिलान्यास 2022 में तत्कालीन जिलाधिकारी पुलकित खरे और मंत्री संजय गंगवार द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। सरकार की योजना के तहत विकसित की गई जगह की जमीन को लेकर अगर कब्जे और अवैध निर्माण के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर जांच का विषय है।

‘माननीय के संरक्षण’ में दबा नोटिस सरकारी जमीन पर निर्माण की चर्चा..

मामले में चर्चा है कि एक माननीय के संरक्षण की वजह अधिकारियों ने निर्माण काम नहीं रुकवाया और प्रभाव के चलते निर्माण के दौरान अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे हटते रहे। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अगर नक्शा स्वीकृत नहीं है तो निर्माण क्यों नहीं रोका गया? रिवर फ्रंट की दीवार किसने तोड़ी? मजिस्ट्रेट के नोटिस के बाद क्या कार्रवाई हुई? उधर एसडीएम श्रद्धा सिंह ने बताया जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी ।

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