BJP की दलित महिला विधायक के अपमान का आरोप,समाज कल्याण मंत्री की मध्यस्थता के बाद भी बोलीं “अभी संतुष्ट नहीं हूं”

लखनऊ : मंदिर में BJP की दलित महिला विधायक के अपमान का आरोप, पूजा तक नहीं करने दी गईं। जिस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बजट मंजूर कराया, उसी के भूमिपूजन में किनारे कर दी गईं मलिहाबाद विधायक जय देवी कौशल; समाज कल्याण मंत्री की मध्यस्थता के बाद भी बोलीं “अभी संतुष्ट नहीं हूं”

राजधानी के काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर के भूमिपूजन में BJP की अनुसूचित जाति की महिला विधायक जय देवी कौशल ने अपने साथ जातिगत भेदभाव और अपमान किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। विधायक का कहना है कि उन्हें धार्मिक अनुष्ठान में शामिल नहीं होने दिया गया। वे पूजा करती रहीं, लेकिन उन्हें फूल छूने, अगरबत्ती जलाने और आरती में शामिल होने तक का अवसर नहीं दिया गया।

मलिहाबाद से विधायक जय देवी कौशल पासी समाज से आती हैं। उनका आरोप है कि मंदिर के जीर्णोद्धार और विकास के लिए उन्होंने स्वयं सरकारी बजट की व्यवस्था कराई, लेकिन जब भूमिपूजन का अवसर आया तो उन्हें ही पूजा से अलग कर दिया गया। पर्यटन विभाग से मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹76–78 लाख मंजूर होने की बात सामने आई है। विधायक पक्ष के अनुसार, आसपास के मंदिर कार्यों को मिलाकर लगभग ₹1.5 करोड़ की व्यवस्था कराई गई।

जय देवी कौशल ने कहा कि जब वे भूमिपूजन के लिए पहुंचीं तो उन्हें विधिवत पूजा नहीं करने दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक निर्वाचित विधायक के साथ जाति के आधार पर ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो समाज के सामान्य दलित व्यक्ति के साथ क्या होता होगा?

विवाद बढ़ने के बाद सरकार के समाज कल्याण मंत्री मंदिर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत की। विधायक के अनुसार, मंत्री ने माना कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों ने अपनी गलती स्वीकार की है, लेकिन आरोपित लोगों ने विधायक के सामने आकर सीधे माफी नहीं मांगी।

जय देवी कौशल ने कहा, “समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने अपनी बात रखी और हमने उसे स्वीकार किया, लेकिन मैं अभी संतुष्ट नहीं हूं। मंदिर की नई समिति बनाने की बात पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ। अपने क्षेत्र की जनता से बातचीत करने के बाद ही अगला कदम तय करूंगी।”

विधायक ने मांग की है कि मंदिर की नई समिति बनाई जाए और जनता जो निर्णय करे, वही उन्हें स्वीकार होगा। दूसरी तरफ मंदिर से जुड़ी हिंदू जनसेवा समिति ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। समिति का दावा है कि विधायक से नारियल फोड़ने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उन्होंने सम्मान और माला स्वीकार नहीं की तथा कार्यक्रम से चली गईं।

इस घटना ने BJP सरकार और संगठन के सामने असहज सवाल खड़ा कर दिया है, जब सत्तारूढ़ दल की अनुसूचित जाति की महिला विधायक को मंदिर में पूजा और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़े, तो सामाजिक समरसता के दावों का क्या अर्थ रह जाता है?

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