
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले देश भर के वाहन चालकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारत अब पूरी तरह से डिजिटल, इंटेलिजेंट और बैरियर-फ्री टोलिंग प्रणाली की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान घोषणा की है कि देश में नई एआई आधारित टोल व्यवस्था फरवरी-मार्च 2027 तक पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है। इस नई व्यवस्था के शुरू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार एआई और निर्बाध (सीमलेस) टोल प्रणाली के जरिए टोल चौकियों पर रुकने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। भविष्य के भारतीय राजमार्ग पूरी तरह से इंटेलिजेंट, बाधा-रहित और कैशलेस होंगे। इस नई प्रणाली के तहत स्वचालित वाहन नंबर प्लेट पहचान तकनीक और फास्टैग को आपस में एकीकृत किया जाएगा, जिससे टोल प्लाजा पर वाहनों का वेटिंग टाइम पूरी तरह शून्य हो जाएगा और गाड़ियों की रफ्तार पर कोई ब्रेक नहीं लगेगा।
सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस आधुनिक बाधा-मुक्त डिजिटल टोलिंग प्रणाली से वाहन चालकों के बहुमूल्य समय की भारी बचत होगी। इसके साथ ही, टोल संग्रह में पूरी तरह पारदर्शिता आने से सालाना टोल राजस्व में लगभग 10,000 करोड़ रुपये की बंपर बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है। गौरतलब है कि भारत में फास्टैग प्रणाली बेहद सफल रही है। साल 2014 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुए और 2021 में अनिवार्य किए गए फास्टैग का उपयोग आज देश के 98 प्रतिशत से अधिक वाहनों में हो रहा है और अब तक 13 करोड़ से ज्यादा टैग जारी किए जा चुके हैं।
इस बीच, वाहन चालकों की एक बड़ी समस्या का समाधान करते हुए केंद्रीय मंत्री ने ‘OneTag’ नाम की नई सुविधा भी लॉन्च की है। इस नई व्यवस्था के आने के बाद यदि कोई यूजर अपने फास्टैग का बैंक बदलना चाहता है, तो उसे अपनी गाड़ी से पुराना टैग हटाने या नया टैग खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। उपयोगकर्ता बिना किसी झंझट के आसानी से अपना बैंक खाता बदल (पोर्ट) सकेंगे। सरकार के इन क्रांतिकारी कदमों से देश में सड़क परिवहन का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है।









