“UCC का मकसद बराबरी नहीं, बल्कि 18 करोड़ मुसलमानों को टारगेट करना है”… AIMIM प्रमुख का बड़ा बयान…

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूसीसी को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इसका मकसद मुसलमानों को टारगेट करना है। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 से पहले सभी एनडीए राज्यों में यूसीसी लागू करने का ऐलान किया है।

देश में UCC को लेकर राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर से काफी तेज हो गई है। AIMIM के प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने आरोप लगाया कि देश में यूएसीसी (UCC) को आगे बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य समानता या बराबरी लाना नहीं है, बल्कि इसके जरिए विशेष रूप से भारत के 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा करके बीजेपी और आरएसएस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, 14, 26 और 29 का सीधा उल्लंघन कर रहे हैं।

बता दें, असदुद्दीन ओवैसी ने देश के बहुसंस्कृतिवाद (प्लूरलिज्म) का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की अपनी लॉ कमीशन रिपोर्ट ने भी पहले यह स्पष्ट किया था कि देश के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड न तो जरूरी है और न ही प्रासंगिक। उन्होंने गोवा के मौजूदा सिविल कोड का जिक्र करते हुए बीजेपी को खुली चुनौती दी और कहा कि अगर हिम्मत है तो गोवा विधानसभा चुनाव से पहले वहां अपने मॉडल का यूसीसी लागू करके दिखाएं। ओवैसी ने गोवा के कानूनों में मौजूद धार्मिक और सामुदायिक छूटों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या सरकार उन विशेष प्रावधानों को खत्म करने की हिम्मत जुटाएगी।

दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान यूसीसी को लेकर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। गृह मंत्री ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के शासन वाले सभी 21 राज्यों में साल 2029 से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) सफलतापूर्वक लागू कर दिया जाएगा।

अमित शाह ने अपने संबोधन में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सर्जिकल स्ट्राइक और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश सुरक्षा और विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। बहरहाल, ओवैसी के तीखे बयानों और गृह मंत्री अमित शाह की इस समयसीमा वाली घोषणा के बाद देश की राजनीति में एक नया वैचारिक और राजनीतिक घमासान छिड़ गया है, और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक दल आमने-सामने नजर आ सकते हैं।

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