
डेस्क : कानपुर नगर निगम में करोड़ों रुपये के ई-टेंडर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि नियमों को दरकिनार कर 37 टेंडर कथित तौर पर चहेते ठेकेदारों को बांटे गए और अब पूरे मामले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
शिकायत के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में आखिरी समय में ऑनलाइन बिड अपलोड करने का खेल किया गया। आरोप है कि बिड की समय-सीमा खत्म होने से कुछ मिनट पहले टेंडर अपलोड किए गए, जिससे दूसरे ठेकेदारों को बोली लगाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका।
डेडलाइन से पहले टेंडर प्रक्रिया दर्ज होने का आरोप
25 जून को जारी किए गए टेंडरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि डेडलाइन पूरी होने से करीब 15 से 20 मिनट पहले ही टेंडर प्रक्रिया रिकॉर्ड में दर्ज कर ली गई। सबसे गंभीर सवाल तकनीकी रिकॉर्ड को लेकर उठाया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि 37 में से 33 टेंडर एक ही कंप्यूटर सिस्टम से अपलोड किए गए। शिकायतकर्ता ने इसे कथित मिलीभगत और टेंडर पूलिंग का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
1 प्रतिशत से कम बिलो रेट पर टेंडर का दावा
आरोप यह भी है कि इस पूरी प्रक्रिया से नगर निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि सभी टेंडर 1 प्रतिशत से भी कम बिलो रेट पर डाले गए। अलीगढ़ के अमित उपाध्याय ने हलफनामे के साथ उद्यान अधीक्षक दिवाकर भास्कर के खिलाफ साक्ष्य पेश करने का दावा किया है। हालांकि, दिवाकर भास्कर का कहना है कि संबंधित टेंडर प्रक्रिया पहले ही रद्द कर दी गई थी।
SIT जांच की मांग
अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नगर निगम स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता ने धमकी मिलने का भी आरोप लगाया है और पूरे मामले की SIT से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी, तो 33 टेंडर एक ही कंप्यूटर सिस्टम से अपलोड होने का रिकॉर्ड कैसे सामने आया? करोड़ों रुपये की इस कथित टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और अगर हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है ?









