
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि यूपीआई इकोसिस्टम में एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) से जुड़े बदलाव विदेशी प्रभाव के कारण किए गए हैं। मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले पूरी तरह स्वतंत्र रूप से लेता है और विदेशी प्रभाव संबंधी दावे पूरी तरह गलत हैं।
यूपीआई बना दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम
मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 2016 में लॉन्च होने के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है। यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है। सरकार के मुताबिक, यूपीआई ने अकेले इस साल अगस्त महीने में 24.5 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए। हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर, समावेशी और सस्ता डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है।
बड़े लेनदेन पर मामूली फीस का प्रस्ताव
सरकार ने बताया कि इस सिस्टम को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और नवोन्मेषी बनाए रखने के लिए ज्यादा कीमत वाले लेनदेन पर मामूली फीस लेने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इससे आम ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल अब भी पूरी तरह मुफ्त है। दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करना—इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगता है।
‘इस फैसले से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं’
सूत्रों के मुताबिक, जब एक शीर्ष अधिकारी से पूछा गया कि क्या सरकार इस कदम को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने साफ कहा कि यह निर्णय बहुत सोच-समझकर लिया गया है और इससे पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।









