Dharavi Redevelopment: काम में देरी करने वाले निवासियों का Transit Rent घटेगा, सहयोग करने वालों को मिलेगा पूरा लाभ

मुंबई, 27 सितंबर 2026: धारावी पुनर्विकास परियोजना में जानबूझकर देरी करने वाले निवासियों को अब कम ट्रांजिट रेंट मिलेगा। वहीं, पुनर्विकास कार्य में सहयोग करने वाले निवासियों को पहले की तरह पूरा किराया लाभ मिलता रहेगा। परियोजना की स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) Adani Navbharat Developers Pvt Ltd (ANDPL) ने यह जानकारी दी है।

साइट खाली होने के बाद ही शुरू हो सकता है निर्माण

ANDPL के मुताबिक, पुनर्वास घरों का निर्माण तब तक शुरू नहीं हो सकता, जब तक संबंधित साइट पूरी तरह खाली न हो जाए। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर प्रक्रिया में देरी करने से उन हजारों परिवारों को भी इंतजार करना पड़ता है, जो परियोजना के लिए सहयोग करने को तैयार हैं।

कंपनी के अनुसार, धारावी पुनर्विकास परियोजना से करीब 10 लाख निवासियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

गैर-सहयोग करने वालों पर कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान

ANDPL ने कहा कि महाराष्ट्र स्लम एरिया एक्ट, 1971 की धारा 33 और 38 तथा DCPR 2034 के Regulation 33(10A) की धाराओं 1.14(iii) और (iv) के तहत महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजना में जानबूझकर देरी करने वाले गैर-सहयोगी निवासियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

कंपनी के मुताबिक, ऐसे मामलों में संबंधित लोगों को आगे किराये या ट्रांजिट आवास के लाभ से वंचित भी किया जा सकता है। हालांकि, ANDPL ने कहा है कि वह ऐसे निवासियों को भी कम दर पर किराये का भुगतान जारी रखेगी।

किसे कितना मिलेगा ट्रांजिट रेंट?

ANDPL ने गैर-सहयोग करने वाले निवासियों के लिए संशोधित भुगतान की जानकारी दी है।

  • ग्राउंड फ्लोर: ₹18,000 की जगह ₹15,000 प्रति माह
  • अपर फ्लोर: ₹15,000 की जगह ₹12,000 प्रति माह
  • कमर्शियल और इंडस्ट्रियल: ₹175 प्रति वर्ग फुट की जगह ₹145 प्रति वर्ग फुट
  • शिफ्टिंग अलाउंस: गैर-सहयोगी परिवारों को एकमुश्त शिफ्टिंग भत्ता नहीं मिलेगा।

सहयोग करने वाले निवासियों को पूरा लाभ

ANDPL ने स्पष्ट किया है कि पुनर्विकास कार्य में सहयोग करने वाले निवासियों के ट्रांजिट रेंट में कोई कटौती नहीं होगी और उन्हें पहले से तय पूरा किराया लाभ मिलता रहेगा।

कंपनी के अनुसार, गैर-सहयोग करने वाले निवासियों के भुगतान में कटौती से पुलिस बंदोबस्त, अतिरिक्त श्रम और उपकरणों जैसी देरी के कारण होने वाली अतिरिक्त लागत की आंशिक भरपाई करने का उद्देश्य है।

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