
सोमालिया: सोमालिया के पुंटलैंड के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि समुद्री लुटेरों द्वारा अपहृत किए गए एमटी ऑनर 25 पेट्रोलियम उत्पाद टैंकर को सुरक्षा बलों ने रेस्क्यू कर लिया। हालांकि, ऑपरेशन शुरू होने से पहले समुद्री लुटेरों ने जहाज के पांच क्रू सदस्यों की हत्या कर दी। मृतकों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है।
16 समुद्री लुटेरों को किया गया गिरफ्तार
पुंटलैंड के सूचना मंत्रालय के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने एक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जहाज को सफलतापूर्वक छुड़ा लिया और 16 समुद्री लुटेरों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही लुटेरों ने क्रू के पांच सदस्यों की हत्या कर दी थी।
मृतकों में तीन पाकिस्तान, एक म्यांमार और एक भारत का नागरिक शामिल था। वहीं क्रू के चार अन्य सदस्य घायल हुए, जिनमें तीन पाकिस्तानी और एक भारतीय नागरिक शामिल हैं।
दूसरे अपहृत जहाज को भी कराया गया मुक्त
पुंटलैंड के अधिकारियों ने मंगलवार को एक दूसरे जहाज को भी बचाने की जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, 17 क्रू सदस्यों वाले इस जहाज को अप्रैल में समुद्री लुटेरों ने कब्जे में लिया था और बाद में मई में इसके अपहरण की घटना सामने आई थी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सोमालिया के तट पर समुद्री लूट की घटनाओं में फिर बढ़ोतरी देखी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, ईरान युद्ध के प्रभाव और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कारणों से पेट्रोलियम उत्पाद ले जाने वाले टैंकर समुद्री लुटेरों के निशाने पर आ रहे हैं।
अगस्त में हाईजैक किए गए टैंकर को भी कराया गया था मुक्त
यह रेस्क्यू ऑपरेशन पिछले सप्ताह हुए एक अन्य अभियान के बाद हुआ है। उस अभियान में पुंटलैंड की मैरीटाइम पुलिस फोर्स ने सिबु 1 टैंकर को छुड़ाया था। इस टैंकर को सोमालियाई समुद्री लुटेरों ने अगस्त में हाईजैक किया था और यह अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में था।
इन दो रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अगस्त के अंत तक सोमालियाई तट पर समुद्री लुटेरों के कब्जे में रहे छह जहाजों में से पांच जहाज अब छुड़ाए जा चुके हैं।
2008 से 2014 के बीच भी सामने आई थी बड़ी समुद्री लूट
सोमालिया में समुद्री लूट का एक बड़ा दौर 2008 से 2014 के बीच देखा गया था। उस दौरान दुनिया के प्रमुख शिपिंग रूट में से एक पर समुद्री लुटेरों की गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया था। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था और फिरौती के तौर पर भी बड़ी रकम का भुगतान किया गया था।









