हर साल 1.9 लाख लोग हो रहे कैंसर के शिकार, HPV समेत इन वायरस-बैक्टीरिया से बढ़ रहा खतरा

कैंसर को आमतौर पर खराब जीवनशैली, तंबाकू, शराब या जेनेटिक्स से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक ग्लोबल मेडिकल रिसर्च ने कैंसर और संक्रमण के बीच संबंध को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट ऑन्कोलॉजी’ में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 1.9 लाख कैंसर के नए मामले अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया और वायरस जनित संक्रमण से जुड़े हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर में लंबे समय तक रहने वाले कुछ संक्रमण आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकते हैं। इनमें HPV, हेलिकोबैक्टर पायलोरी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एपस्टीन-बार वायरस प्रमुख हैं।

देश के कुल कैंसर मामलों में बड़ा हिस्सा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में कई आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साल 2024 के दौरान 15.62 लाख से ज्यादा कैंसर के नए मामले दर्ज किए गए थे।

इनमें से 12 प्रतिशत से अधिक कैंसर के मामले किसी न किसी पुराने संक्रमण से जुड़े पाए गए। वैश्विक स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। दुनिया में कैंसर के कुल मामलों का करीब 12 फीसदी हिस्सा, यानी लगभग 23 लाख मामले, ऐसे संक्रमणों से जुड़े हैं जिन्हें समय रहते रोका जा सकता है।

HPV बना संक्रमण से जुड़े कैंसर का सबसे बड़ा कारण

भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में सबसे बड़ा योगदान ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) का देखा गया है। अकेले इस वायरस से देश में 1 लाख से ज्यादा कैंसर के मामले जुड़े हैं।

HPV मुख्य रूप से महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता है। हालांकि, इस संक्रमण से जुड़े कैंसर के खतरे को समय रहते टीकाकरण और नियमित जांच के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है।

पेट के कैंसर से जुड़ा है हेलिकोबैक्टर पायलोरी

HPV के बाद हेलिकोबैक्टर पायलोरी नाम का बैक्टीरिया भी भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर का एक प्रमुख कारण है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बैक्टीरिया करीब 47,000 कैंसर मामलों से जुड़ा है।

लंबे समय तक रहने वाला यह संक्रमण आगे चलकर गैस्ट्रिक या पेट के कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए पेट से जुड़ी लगातार बनी रहने वाली समस्याओं को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जाती है।

हेपेटाइटिस बी और सी से भी बढ़ रहा लिवर कैंसर का खतरा

लिवर को प्रभावित करने वाले हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस भी कैंसर के मामलों से जुड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हेपेटाइटिस बी के कारण करीब 10,000, जबकि हेपेटाइटिस सी से करीब 5,300 लिवर कैंसर के नए मामले जुड़े हैं।

वहीं, एपस्टीन-बार वायरस (EBV) भी करीब 22,000 कैंसर मामलों से जुड़ा पाया गया है।

शरीर में लंबे समय तक रह सकते हैं संक्रमण

इनमें से कुछ संक्रमण शरीर में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण शरीर की कोशिकाओं में बदलाव पैदा कर सकता है और कुछ परिस्थितियों में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

इसी वजह से संक्रमण की पहचान, रोकथाम और समय पर इलाज कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वैक्सीनेशन और समय पर जांच से बचाव संभव

रिपोर्ट के सामने आने के बाद संक्रमण से जुड़े कैंसर की रोकथाम पर भी ध्यान बढ़ा है। चूंकि इनमें से कई कैंसर संक्रमण से जुड़े हैं, इसलिए टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर इलाज इनके खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।

लड़कियों को उचित उम्र में HPV वैक्सीन देना और नवजात बच्चों को हेपेटाइटिस बी का टीका लगाना रोकथाम के महत्वपूर्ण उपाय हैं। इसके अलावा, लंबे समय से बनी पेट की समस्या या किसी संक्रमण के लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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