“कोरियाई प्रायद्वीप में सुलगती चिंगारी और कूटनीतिक जंग”… जानें रूस ने क्यों कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया बिगाड़ रहे हैं हालात…

रूस ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज को उकसावे वाली कार्रवाई बताया। मॉस्को ने नॉर्थ कोरिया के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।

रूस ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज पर कड़ी आपत्ति जताई है। मॉस्को ने इन सैन्य अभ्यासों को उकसावे वाली कार्रवाई करार देते हुए आरोप लगाया है कि इनके जरिए नॉर्थ कोरिया पर संभावित हमले की तैयारी की जा रही है। रूसी विदेश मंत्रालय ने प्योंगयांग के सैन्य और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के अधिकार का भी समर्थन किया है।

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने इसके लिए अमेरिका और दक्षिण कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया। ज़खारोवा के मुताबिक, क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है।

DMZ के पास सैन्य अभ्यास पर रूस की आपत्ति

मॉस्को ने विशेष रूप से डिमिलिटराइज्ड जोन (DMZ) के पास अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज पर चिंता जताई है। रूस का दावा है कि इन युद्धाभ्यासों का उद्देश्य नॉर्थ कोरिया के खिलाफ संभावित हमले की तैयारी करना है।

मारिया ज़खारोवा ने कहा कि DPRK की सीमा के नजदीक बड़े पैमाने पर हो रहे सैन्य अभ्यास खुले तौर पर उकसाने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन अभ्यासों में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े संभावित हमलों की रिहर्सल भी शामिल है।

कई सैन्य अभियानों का रूस ने किया जिक्र

रूसी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास अब जमीन, हवा, समुद्र और साइबर क्षेत्र तक फैल चुके हैं। उन्होंने US-ROK आयरन मेस कमांड-पोस्ट एक्सरसाइज, दक्षिण कोरिया की होगुक एक्सरसाइज और अमेरिकी हवाई अभियानों का जिक्र किया।

इसके अलावा उन्होंने 6 नवंबर तक चलने वाली संयुक्त फ्रीडम फ्लैग एयर एक्सरसाइज और सितंबर में जापान के साथ आयोजित तीन देशों की फ्रीडम एज एक्सरसाइज को भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल बताया।

नॉर्थ कोरिया के आत्मरक्षा के अधिकार का रूस ने किया समर्थन

दक्षिण कोरिया की ओर से क्षेत्रीय तनाव के लिए नॉर्थ कोरिया को जिम्मेदार ठहराए जाने पर भी रूस ने असहमति जताई है। मॉस्को ने प्योंगयांग की सैन्य गतिविधियों का बचाव करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आत्मरक्षा का अधिकार बताया।

ज़खारोवा ने कहा कि नॉर्थ कोरिया अपनी सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए जो कदम उठा रहा है, वे पूरी तरह कानूनी हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में दिए गए आत्मरक्षा के अधिकार के अनुरूप हैं।

उन्होंने सियोल से अपील की कि वह डिमिलिटराइज्ड जोन के आसपास उकसावे वाली सैन्य गतिविधियां तत्काल बंद करे और प्योंगयांग के खिलाफ बयानबाजी से बचे।

अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपने कुछ संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती की थी। इसके बावजूद अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने सितंबर में पांच दिवसीय त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास फ्रीडम एज आयोजित किया था।

दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया था कि मल्टीडोमेन फ्रीडम एज एक्सरसाइज के तहत जेजू द्वीप के पूर्व और दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सैन्य अभियान शुरू किए गए।

JCS के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री, हवाई और साइबर समेत विभिन्न क्षेत्रों में तीनों देशों की परिचालन क्षमता और संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना था। साथ ही तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया था।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच रूस के बयान ने कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव और अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान के सैन्य सहयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस को और तेज कर दिया है।

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