राज्यसभा में दिल्ली सेवा बिल की राह कितनी आसान, क्या कहता है राज्यसभा का गणित ?

लोकसभा में ये बिल पास हो चुका है. दिल्ली सेवा बिल को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग दिखाई दे रही है.

दिल्ली- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में दिल्ली सेवा बिल (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार संशोधन विधेयक) को पेश किया है. लोकसभा में ये बिल पास हो चुका है.

दिल्ली सेवा बिल को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग दिखाई दे रही है. दिल्ली की आप सरकार के पास INDIA गठबंधन वाली 26 पार्टियों का समर्थन हैं.

वहीं NDA से जुड़े हुए जो दल हैं उन्हें बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया है. लेकिन दिल्ली सरकार के साथ -साथ विपक्षी दलों का मानना है कि ये बिल पूरी तरह से असंवैधानिक है.

बिल को लेकर कुछ कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि ये बिल मौलिक रुप से अलोकतांत्रिक है. और दिल्ली के लोगों की आवाज पर ये बहुत बड़ा हमला है. बीजेपी दिल्ली को अपने अधीन करने में लगी हुई है.

दिल्ली सेवा बिल पर NDA दल

बात करें राज्यसभा में वर्तमान सदस्य की संख्या तो 237 है. बहुमत का आंकड़ा 119 है. बता दें कि बीजेपी और उसके सहयोगियों के पास 105 सदस्य है.बीजेडी, वाईएसआर और टीडीपी जैसी गैर NDA दलों ने भी समर्थन का ऐलान किया है. जिनमें से हर के एक पास 9 सांसद है. इसी के साथ 5 नामांकित और दो निर्दलीय सांसदों के भी समर्थन का भरोसा मिला है. जिसके बाद कुल मिलाकर संख्या 130 हो जाती है.

दिल्ली सेवा बिल पर विपक्षी दल

वहीं विपक्षी गुट की बात करें तो इंडिया गठबंधन सांसद 104 सांसद है. और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह को सदन से निलंबित कर दिया गया है. इसलिए वो कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकते है.

अरविंद केजरीवाल की सरकार के साथ विपक्षी खेमा बिल को रोकने के लिए जुटा हुआ है. हालांकि संख्या उनके पक्ष में नहीं है. पर बहस में उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिल रहा है.

बता दें कि इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्षी की प्राथमिकता अपने गठबंधन को बचाना है. विपक्ष को मणिपुर की चिंता नहीं है. दिल्ली एक राज्य नहीं बल्कि केंद्र शासित प्रदेश है.संसद को दिल्ली के लिए कानून बनाने का अधिकार है.

Related Articles

Back to top button