
देश की राजधानी दिल्ली में लोकसभा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला है। संसद में पेपर लीक कानून और देश की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह सरकार युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा… “धर्मेंद्र प्रधान का संसद में स्वागत हुआ, लेकिन एक प्रधान ने एक प्रधानमंत्री को बचा लिया।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार डरती है तभी अपनी गलती मानती है। युवाओं के कड़े संघर्ष और विरोध प्रदर्शन के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। यह देश का पहला ऐसा आंदोलन रहा जिसमें छात्र-छात्राओं के साथ उनके मां-बाप भी बड़ी संख्या में जुड़ गए थे।
शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर उठाए गंभीर सवाल
संसद में अपनी बात रखते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी सरकार सिर्फ ‘जुमला’ देती है, वचन नहीं निभाती। देश में सख्त कानून बनने के बाद भी पेपर लीक होने की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 10वीं-12वीं तक के पेपर लीक हुए और 26,386 से ज्यादा प्राइमरी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। सरकार कुल मिलाकर 1 लाख से अधिक स्कूल बंद कर चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि वे एकरंगी शिक्षा व्यवस्था लागू करना चाहते हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी और 69000 शिक्षक भर्ती का मुद्दा
अखिलेश यादव ने रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार खुद तो एक ढंग की यूनिवर्सिटी नहीं बना पाई, लेकिन हथौड़ा लेकर जौहर यूनिवर्सिटी को तोड़ने पहुंच गई। इसके अलावा 69000 शिक्षक भर्ती घोटाले और दलित-पिछड़ों के अधिकारों के हनन का मामला भी सदन में मजबूती से उठाया गया। अंत में चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह इमरजेंसी के बाद देश में बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ था, वैसा ही बदलाव अब फिर से देखने को मिलेगा।









