पुरी रथ यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब… भीड़ में दम घुटने से कई भक्त हुए बेहोश… स्ट्रेचर पर बचाई गई जान…

पुरी रथ यात्रा के दौरान सिंहद्वार पर भक्तों की भारी भीड़ से मची अफरा-तफरी। रेस्क्यू टीमों ने कई लोगों को सुरक्षित निकाला। जानिए रथ यात्रा की प्रमुख रस्मों और भव्य आयोजन की पूरी खबर।

पुरी: ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हुई। हालांकि, ‘बड़दंडा’ (ग्रैंड रोड) पर उमड़े लाखों भक्तों के जनसैलाब ने इस आयोजन को चुनौतीपूर्ण भी बना दिया। सिंहद्वार के पास भीड़ इतनी बढ़ गई कि कई श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके बाद इमरजेंसी रेस्क्यू टीमों ने मोर्चा संभाला और कई लोगों को स्ट्रेचर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

देवताओं की भव्य यात्रा का आरंभ

रथ यात्रा की शुरुआत ‘पहंडी’ नामक दिव्य जुलूस के साथ हुई। परंपरा के अनुसार, भगवान सुदर्शन को सबसे पहले रथ पर विराजमान किया गया, जिसके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में ब्रह्मांड के स्वामी भगवान जगन्नाथ अपने भव्य लकड़ी के रथों—तलध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष—पर सवार हुए। यह दृश्य अत्यंत भावुक और अलौकिक था। देवताओं को गुंडिचा मंदिर की अपनी सालाना यात्रा के लिए उनके रथों पर विधिवत स्थापित किया गया।

शंकराचार्य और राजा की विशेष पूजा

इस भव्य आयोजन की शोभा बढ़ाने के लिए गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य, स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अपने शिष्यों के साथ रथों के पास पहुँचकर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद, पुरी के राजा, गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब ने ‘छेरा पहनरा’ की रस्म निभाई। राजा ने शाही पालकी में बैठकर तीनों रथों के प्लेटफॉर्म को सोने की झाड़ू से साफ किया और पवित्र जल छिड़ककर भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

भक्तों का जुनून और सुरक्षा की चुनौती

दोपहर करीब 2 बजे जैसे ही रथों पर लकड़ी के घोड़े लगाए गए, भक्तों का उत्साह चरम पर पहुँच गया और रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। सुरक्षाकर्मियों और मेडिकल टीमों ने भीड़ के बीच कड़ी निगरानी रखी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। गर्मी और भारी उमस के बीच, रेस्क्यू टीमों की तत्परता ने कई भक्तों की जान बचाई।

पुरी की सड़कों पर ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। लाखों भक्तों के लिए यह यात्रा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का एक माध्यम है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भीड़ के दौरान धैर्य रखने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। भगवान जगन्नाथ की यह यात्रा गुंडिचा मंदिर तक की दूरी तय करेगी, जहाँ देवता कुछ दिनों के लिए विश्राम करेंगे।

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