संसद के मानसून सत्र से पहले मायावती ने उठाए कई मुद्दे, पहलगाम आतंकी हमले से लेकर महंगाई तक पर सरकार को घेरा

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने संसद के मानसून सत्र से पहले देश के कई अहम मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक बार फिर यह देखने की चिंता है कि क्या इस बार भी संसद का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा या जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होगी।

मायावती ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला, रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या, महिलाओं की सुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए संसद में प्रभावी बहस जरूरी है।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर मायावती ने जताई चिंता

बसपा प्रमुख ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी, रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों को लेकर देश में चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर राजनीतिकरण करने वालों को इस पर चिंतन करना चाहिए और इसकी आड़ में चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीति नहीं होनी चाहिए।

बंगाल हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा पर उठाए सवाल

मायावती ने पश्चिम बंगाल में महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध और कानून व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ती आपराधिक घटनाएं गंभीर विषय हैं। साथ ही उन्होंने बिहार में चुनावी रेवड़ियों, सरकारी योजनाओं और घोषणाओं को लेकर भी सवाल उठाए।

ईरान-इजरायल युद्ध और विदेश नीति पर कही बात

मायावती ने ईरान-इजरायल युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव सहित वैश्विक घटनाओं पर भारत को सावधानी से कदम उठाने होंगे।

जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय का मुद्दा

बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में जातीय जनगणना की मांग लंबे समय से उठ रही है। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए जातीय जनगणना जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में प्रभावी चर्चा की जरूरत बताई।

संसद में सार्थक चर्चा की अपील

मायावती ने कहा कि संसद को जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा का मंच बनना चाहिए। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि संसद की गरिमा बनाए रखते हुए जनता से जुड़े विषयों पर बहस की जाए।

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