राजभर की नसीहतों पर बोले अखिलेश, हमें किसी के सलाह की जरूरत नहीं !

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय में सदस्यता अभियान की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने पार्टी के अन्य नेताओं के साथ बैठक कर सदस्यता अभियान पर चर्चा की. इस बैठक के दौरान उन्होंने राजभर की तरफ से मिली नसीहत पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा की हमे किसी की सलाह की जरुरत नहीं है.

रविवार को अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम का पद छोड़ अन्य सभी राष्ट्रीय व राज्य स्तर की सभी कार्यकारिणियों को भंग कर दिया था. इसके बाद मंगलवार को पार्टी कार्यालय में पार्टी सदस्यता अभियान को शुरू किया गया. सपा प्रमुख ने कहा की सदस्यता अभियान के बाद पार्टी संगठन निर्माण व अन्य कार्यकारिणियों पर विचार करेगी। संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी कार्यकर्त्ता गांव – गांव, गली – गली जाकर इस अभियान को सफल बनाएंगे. इस बैठक में अखिलेश ने कई सवाल भी किये.

इस बैठक में उन्होंने योगी सरकार के 100 दिनों पर भी उंगली उठाते हुए कहा की भाजपा को पिछले 5 साल 100 दिनों के कामों को गिनाना चाहिए. सरकार 100 दिनों की उपलब्धियों को गिना रही है. हर दिन भ्रष्टाचार, अन्याय की नई उपलब्धि देखने को मिल रही है. उपलब्धि की सबसे बड़ी पोल तब खुली जब उपमुख़्यमंत्री वापस लखनऊ आये और उनसे बिना पूछे तबादले का फैसला ले लिया जाता है.

अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर की तरफ से मिली नसीहत का भी जबाब दिया। उन्होंने कहा की हमे किसी की नसीहत की जरुरत नहीं है. हम हर किसी को खुश नहीं कर सकते, अगर कोई नाराज है तो हम क्या करे. आगे उन्होंने कहा की आजकल राजनीति पर्दे के पीछे से ऑपरेट की जा रही है. आज़मगढ़ और रामपुर चुनाव प्रचार में न जाने के बाद मिली हार पर उन्होंने कहा की उन्हें जीत का भरोसा दिलाया गया था.

बतादें की बीते दिनों उप लोकसभा चुनाव के परिणाम में समाजवादी पार्टी को मिली हार के बाद सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल खड़े किये थे. जिसमें उन्होंने कहा था कि पिता मुलायम सिंह के नेतृत्व में 2012 में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का प्राप्त किया था. जिसके बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व में 2014, 2017, 2019, 2022 व अन्य उप चुनावों में सपा लगातार विफल रही है. अखिलेश यादव को इस विषय में स्वयं स्पष्ट करना चाहिए की उन्हें अभी तक जीत क्यों नहीं मिली.

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