
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के रजिस्ट्रेशन और उम्र के प्रमाण को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट के अनुसार, आधार कार्ड को उम्र या जन्मतिथि के निर्णायक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। विवाह पंजीकरण के लिए उम्र साबित करने के उद्देश्य से जन्म प्रमाणपत्र या हाईस्कूल के रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज जरूरी हैं।
आधार कार्ड केवल पहचान का प्रमाण
बता दे कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की पहचान स्थापित करना है। इसे जन्मतिथि या उम्र का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे में शादी के रजिस्ट्रेशन के दौरान केवल आधार कार्ड के आधार पर उम्र की पुष्टि करना उचित नहीं है। उम्र के सत्यापन के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों को महत्व दिया जाना चाहिए।
जन्म प्रमाणपत्र या हाईस्कूल रिकॉर्ड जरूरी
कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाणपत्र या हाईस्कूल के शैक्षिक रिकॉर्ड जैसे दस्तावेजों का सहारा लिया जाना चाहिए। इन दस्तावेजों के जरिए विवाह करने वाले पक्षों की उम्र का सत्यापन किया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उम्र से जुड़े तथ्यों की सही जांच सुनिश्चित करना है।
बाल विवाह रोकने पर जोर
हाईकोर्ट ने बाल विवाह रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। विवाह के समय उम्र का सही सत्यापन करना बाल विवाह की रोकथाम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर उम्र की जांच से कम उम्र में विवाह के मामलों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।









