अमेठी पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में लापरवाही,पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम सूची से गायब

अमेठी : उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची (Voter List) में भारी गड़बड़ी और त्रुटियों के गंभीर आरोप लगे हैं। इस लापरवाही का आलम यह है कि अमेठी से पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम ही वोटर लिस्ट से पूरी तरह गायब कर दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल गड़बड़ी के सामने आते ही जिले के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, स्मृति ईरानी का नाम अमेठी के गौरीगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली मेदन मवई ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज था, जहां उन्होंने अपना स्थानीय आवास भी बनाया हुआ है। अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने डेटा खंगाला, तो पता चला कि पूर्व केंद्रीय मंत्री का नाम ही गायब है। इसके विपरीत, मतदाता सूची में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां गांव के कई ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में धड़ल्ले से दर्ज हैं, जिनका काफी समय पहले निधन (मृत्यु) हो चुका है।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने की SDM से शिकायत, जांच का मिला आश्वासन
मतदाता सूची में इस तरह की बुनियादी और बड़ी त्रुटियों को लेकर मेदन मवई के प्रधान प्रतिनिधि तीरथराज मिश्र ने सबसे पहले आवाज उठाई और आधिकारिक रूप से त्रुटियों की लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय जिलाध्यक्ष ने तुरंत इस पर संज्ञान लिया। भाजपा जिलाध्यक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की।

शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। एसडीएम ने भाजपा नेताओं और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि इस पूरी लापरवाही की त्वरित जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि जो भी तकनीकी या मानवीय त्रुटि हुई है, उसे समय रहते दुरुस्त कर आवश्यक सुधार कर लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, मतदाता सूची में इतनी बड़ी धांधली और खामियों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि जब देश के बड़े नेताओं के नाम गायब हो सकते हैं, तो आम जनता की सूचियों के साथ कितना खिलवाड़ हो रहा होगा।

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