8 महीने, 9 फैसले और 22 अभियुक्तों को फांसी: मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर के कड़े रुख की पूरे देश में चर्चा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में न्याय व्यवस्था का एक अनोखा और ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर-5) रवि कुमार दिवाकर के फैसलों की चर्चा पूरे प्रदेश और न्याय जगत में जोर-शोर से हो रही है। दिसंबर 2025 में बरेली से मुजफ्फरनगर ट्रांसफर होकर आए जज रवि कुमार दिवाकर ने महज 8 महीनों के कार्यकाल में 9 अलग-अलग जघन्य हत्याकांडों में 22 अभियुक्तों को फांसी (सजा-ए-मौत) की सजा सुनाई है।

न्यायाधीश के इस सख्त और त्वरित न्याय के रुख से अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है। फैसलों के सिलसिले की शुरुआत 6 अप्रैल को समीर सैफी हत्याकांड से हुई, जिसमें 3 दोषियों को फांसी दी गई। इसके बाद 28 अप्रैल को शेखर हत्याकांड में 4, 30 मई को राजेश देवी हत्याकांड में 1, और 20 जून को राजेंद्र सैनी हत्याकांड में 2 अपराधियों को मृत्युदंड मिला।

सजा का यह क्रम यहीं नहीं रुका; 2 जुलाई को होमगार्ड हत्याकांड में 1, 6 जुलाई को राजबीर हत्याकांड में 2, और 17 जुलाई को राजसिंह हत्याकांड में 4 दोषियों को फांसी सुनाई गई। अगस्त के महीने में भी कड़ा रुख जारी रहा, जहां 12 अगस्त को सालिम हत्याकांड में 1 और 13 अगस्त को पवन हत्याकांड में 4 अभियुक्तों को सजा-ए-मौत दी गई। त्वरित और कड़े न्याय के इन फैसलों ने पीड़ितों को न केवल राहत दी है, बल्कि कानून व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा और मजबूत किया है।

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