
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है। अखाड़े का कहना है कि मौजूदा ट्रस्ट एक निजी ट्रस्ट की तरह काम कर रहा है, जो 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भावना के अनुरूप नहीं है।
निर्मोही अखाड़े की प्रमुख मांगें
निर्मोही अखाड़े ने मांग की है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पब्लिक ट्रस्ट के रूप में पुनर्गठित किया जाए और इसमें स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
अखाड़े ने केंद्र सरकार से ट्रस्ट डीड में संशोधन कर बोर्ड में रामानंदी बैरागी संप्रदाय के सदस्यों को शामिल करने की मांग की है।
पूजा व्यवस्था और पारंपरिक भूमिका बहाल करने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि राम मंदिर में पूजा, भोग, सेवा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में निर्मोही अखाड़े की पारंपरिक भूमिका को बहाल किया जाए।
इसके अलावा ट्रस्ट के वित्तीय और संपत्ति संबंधी सभी लेन-देन की फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।
स्वतंत्र समिति और मूल प्रतिमाओं की बहाली की मांग
निर्मोही अखाड़े ने 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्रियान्वयन की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। साथ ही 5 जनवरी 1950 और फरवरी में कुर्क की गईं मूल रामलला विराजमान प्रतिमाओं को दोबारा स्थापित करने की मांग भी की गई है।
चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का हवाला
अखाड़े की ओर से यह याचिका सरपंच, महंत एवं सर्वाकार महंत राजा रामचंद्राचार्य अतीत गुरु रघुनाथ दास के माध्यम से दाखिल की गई है। आवेदन में हाल में सामने आई चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों का भी जिक्र किया गया है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित है।









