
नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता या शासन व्यवस्था में बदलाव को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम से एक आंधी चली है, जो हर प्रकार के संस्कार का विरोध करती है। अपने संबोधन में उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि रिजीम चेंज करने से परिस्थितियां बदल जाएंगी, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और आज भी ऐसा नहीं होगा।
”रिजीम चेंज करने से परिस्थिति नहीं बदलेगी”,रिजीम चेंज वाले बयान पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत. https://t.co/R5cWtpdOYF
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) October 20, 2026
‘पश्चिम से एक आंधी चली है’
मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से एक ऐसी आंधी चली है, जो हर प्रकार के संस्कार का विरोध करती है। उन्होंने अपने संबोधन में फ्रांस और अल्बानिया का जिक्र करते हुए कहा कि वहां क्या हो रहा है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया।
‘रिजीम चेंज से परिस्थिति बदलने का दावा सही नहीं’
संघ प्रमुख ने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि रिजीम चेंज करने से परिस्थितियों में बदलाव आ जाएगा। हालांकि, उन्होंने इस विचार पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है और आज भी ऐसा नहीं होगा।
भागवत के मुताबिक, केवल शासन व्यवस्था या सत्ता में बदलाव कर देने से परिस्थितियां अपने आप नहीं बदलतीं। उनके इस बयान में सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को लेकर उनके नजरिए की झलक दिखाई दी।
फ्रांस से नेपाल-बांग्लादेश तक का किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने अलग-अलग देशों की परिस्थितियों का उल्लेख किया। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश का नाम लेते हुए लोगों से इन देशों में हो रही घटनाओं पर ध्यान देने की बात कही।
उनके बयान के बाद ‘रिजीम चेंज’ और उससे परिस्थितियों में आने वाले बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, भागवत ने अपने इस बयान में किन विशिष्ट घटनाओं को आधार बनाया, इसे स्पष्ट करने के लिए संबोधन का विस्तृत संदर्भ महत्वपूर्ण होगा।









